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हल्द्वानी न्यूज़ : जिला योजना का 40 प्रतिशत करें कृषि सेक्टर पर खर्च

हल्द्वानी। कृर्षि उद्यान पशुपालन एवं रेखीय विभागों की सर्किट हाउस में मण्डलीय बैठक लेते हुए कृर्षि उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पूरा विश्व कोविड-19 महामारी से प्रभावित है। कई प्रकार के उद्योग अभी भी बन्द है, ऐसी स्थिति कृषि आधारित सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि कृषि, उद्यान आधारित सेक्टर में ही रोजगार की सम्भावनायें है। इस सेक्टर को हमें और मजबूत करना है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे कृषि एलाइड सेक्टर के अधिकारियों में विभागीय समन्वय स्थापित करते हुए कृषकों को और अधिक बेहतर सुविधायें देते हुए योजनाओं का लाभ देना सुनिश्चित करें।

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जिला योजना का 40 प्रतिशत की धनराशि कृषि सेक्टर में व्यय करना सुनिश्चित करें, जिससे अधिक से अधिक कृषकों एवं कृषि आधारित व्यवसायियों को लाभ मिल सके व उनकी आय में वृद्धि हो सके। कृषि, उद्यान मंत्री उनियाल ने कहा कि एकीकृत कृषि बागवानी योजना पर विशेष फोकस दिया जाए ताकि हम कृषि बागवानी क्षेत्र में आगे बढ़ सकें व अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं कर सकें साथ ही कृषक भी आत्मनिर्भर हो सकें।

उन्होंने कृषि विभाग की राष्टीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री सिचाई योजना, सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन, राष्टीय खादय सुरक्षा मिशन, राष्टीय सम्पोषणीय कृषि मिशन, परम्परागत कृषि विकास योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, फसल बीमा योजना, कृषक उत्पादक समूह एफपीओ, एग्रीकल्चर इंफ्राटैक्चर फंड योजना के साथ ही औद्यानिकरण, पुराने उद्यानों का जीर्णोद्वार, औधानिक यंत्रीकरण, पॉलीहाउस की स्थापना, जलस्रोत्रों का सृजन, मशरूम उत्पादन, खादय प्रसंस्करण ईकाइयो की स्थापना, फल सब्जी पट्टियों की स्थापना, विपणन व्यवस्था के साथ ही पशुपालन, मौनपालन, मत्स्य पालन, कुकुट, रेशम के साथ ही सहकारिता की योजनाओं का समन्वय स्थापित करते हुए कृषकों को लाभ पहुचाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जनपदों में कलैस्टर विकसित किये जांए ताकि कृषकों की आय को दोगुना किया जा सके। उन्होंने बताया कृषकों की उपज विपणन प्रदेश मे 1300 आउटलैट बनाये जा रहे है।

उनियाल ने मण्डल मे संचालित योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि जनपदों में आत्मनिर्भर भारत योजना के अन्तर्गत कृषक उत्पादक समूहों एफपीओ का गठन किया जा रहा है, आगामी तीन वर्षो में तीन सौ समूहों का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा भारत सरकार द्वार महत्वाकाक्षी योजना कृषकों के लिए चलाई जा रही है जिसमें आत्मनिर्भर भारत-एग्रीकल्चर इंफ्रास्टक्चर फंड योजना के अन्तर्गत प्रधानमंत्री ने कृषि विकास के लिए एक लाख करोड़ का फंड जारी किया है इस फंड का इस्तेमाल फसल कटाई के बाद प्रसंस्करण आदि इन्फ्रास्टेक्चर के विकास हेतु किया जाना है।

इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, कलैक्शन सेन्टर फूड प्रोसेसिंग लगाने जैसे कार्यों के लिए ऋण देने के साथ ही गांवों में निजी निवेश और रोजगार को बढावा देना है। योजना के अन्तर्गत प्राइमरी एग्री के्रडिट सोसाइटी, किसानों के समूहों, किसान उत्पान संगठनों, एग्री एंटरप्रिन्योर, स्टार्टअप एंव एग्रीटेक प्लेयर्स को ऋण न्यूनतम 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर दिया जायेगा। इस योजना का अधिक से अधिक कृषकों व कृषि आधारित स्वरोजगारियों को लाभ पहुचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना के साथ ही उपलब्धता को देखते हुए कलस्टर आधारित एकीकृत कृषि कार्यक्रम भी संचालित किये जा रहे है।

जिसमें चालू वित्तीय वर्ष में 12 करोड़ का बजट रखा गया है। मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के अन्तर्गत कृषि सम्बद्व क्षेत्रों के समग्र एवं समेकित विकास करने हेतु कृषि जलवायुवीय, प्राकृतिक संसाधन एवं प्रोद्योगिकी को ध्यान में रखते हुए गहन कृषि विकास से बढावा देने हेतु राष्टीय कृषि योजना के गैप फिंलिग के लिए विशेष अतिरिक्त सहायता प्रदान करने के उददेश्य से राज्य सेक्टर के अन्तर्गत मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना संचालित की गई है। जिसके तहत 18 करोड का बजट प्राविधान किया गया है। कृषकों के उन्नयन के लिए मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना संचालित करते हुए 15 करोड का बजट रखा गया है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी में लॉकडाउन अवधि में कृषि विभाग द्वारा कृषक हितों के लिए 670 कृषि निवेश केन्द्र खोले गये हैं जिसमें कृषकों समय से कृषि निवेश उपलब्ध हो सकेगा। कृषि मंत्री ने प्रत्येक जनपद में एक-एक हर्बल नर्सरी एवं औषधीय पौध नर्सरी स्थापित करने के निर्देश अधिकारियों को दिये साथ ही प्रत्येक न्याय पंचायत मे एक कृषि उद्यान एवं रेखीय विभागों द्वारा सभी योजनायें एकीकृत कर मॉडल गांव बनाने के निर्देश दिये ताकि न्याय पंचायत के अन्य गांव भी प्रेरित होकर एकीकृत योजनाओं को अपनाकर अपनी आय बढा सकें।

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