HomeUttarakhandNainitalलड़ाई पर अडिग रहेंगे गुरिल्ले और सरकार को झुकाएंगे

लड़ाई पर अडिग रहेंगे गुरिल्ले और सरकार को झुकाएंगे

👉 घोड़ाखाल ग्वेल मंदिर से नैनीताल जिले में चल पड़ी गुरिल्लों की रथयात्रा

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ाः अल्मोड़ा व बागेश्वर जिलों के बाद अब गुरिल्ला जन जागरण रथ यात्रा नैनीताल जिले में भी शुरू हो चुकी है। जो नैनीताल जिले में ग्वेल देवता के प्रसिद्ध घोड़ाखाल मंदिर से गत दिवस शुरू हुई। इस दौरान सभाओं में वक्ताओं ने कहा कि गुरिल्ले आंदोलन से कदापि नहीं डिगेंगे बल्कि एकजुटता से सरकार को झुकाकर ही दम लेंगे।

नैनीताल जिले में गुरिल्ला जन जागरण रथयात्रा भवाली, मल्ला रामगढ़, सतबूंगा, धानाचूली होते हुए गत देर शाम खनस्यूं पहुंची। अलग-अलग स्थानों पर सभाओं को संबोधित करते हुए संगठन के केन्द्रीय अध्यक्ष ब्रह्मानंद डालाकोटी ने कहा कि हमारा संगठन ‘संघे शक्ति कलियुगे’ के विचार पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि जब-जब संगठित आंदोलन चलता है, तब-तब सरकारें झुकी हैं। यही वजह है कि गुरिल्लों के समायोजन के मामले में केन्द्र व राज्य सरकारों की ओर से प्रयास हुए। उन्होंने गुरिल्लों को संगठित होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मध्य में सरकारों के सकारात्मक प्रयासों और आंदोलन के लंबे खिचने से लड़ाई में शिथिलता आई। इस शिथिलता में केन्द्र व राज्य सरकारों ने गुरिल्लों को भुला दिया।

परिणाम यह हुआ कि शासन में गतिमान गुरिल्लों की फाइलें जहां थीं, वहीं अटक गई। इसलिए फिर से गुरिल्लों को हुंकार भरनी पड़ी है और अब संगठित होकर सरकारों को उनके वादे, जारी शासनादेशों व निर्णयों की याद दिलाकर मांगों की पूर्ति करवाना लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जनजागरण रथयात्रा के जरिये गुरिल्ले अब जनता को भी 17साल लंबे और 5000 दिन के धरने की पीड़ा बता रहे हैं। नैनीताल के जिलाध्यक्ष पीतांबर मेलकानी ने कहा कि जब-जब दिल्ली देहरादून में हमने बड़ी भीड़ जमा की, तब तब पक्ष विपक्ष के दर्जनों सांसद हमारी रैलियों में शामिल हुए हैं। मगर अब दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि वर्तमान सांसद गुरिल्लों की मांगों पर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में पहले से अधिक मजबूती के साथ लड़ाई लड़नी होगी, ताकि सरकार को झुकाया जा सके। यात्रा के दौरान सभाओं में भीमताल के अध्यक्ष मोहन सिंह रौतेला, रामगढ़ ब्लाक अध्यक्ष बहादुर सिंह मेहता, ओखलकांडा के अध्यक्ष शेखर भट्ट, बसंत लाल, गोपाल सिंह राणा ने अपने विचार रखे।

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