कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी वृद्धि पर बिफरे विधायक
CNE REPORTER, अल्मोड़ा। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी को लेकर अल्मोड़ा के कांग्रेस विधायक मनोज तिवारी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए कहा कि सरकार के इस फैसले से छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग के उद्यमियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। विधायक तिवारी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी होटल, रेस्टोरेंट संचालकों और छोटे व्यवसायियों के हितों की रक्षा के लिए मजबूती से आवाज उठाएगी।


विधायक मनोज तिवारी ने अपने बयान में कहा कि एक ही झटके में 993 रुपये की भारी वृद्धि कर कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत को 3,000 रुपये के पार पहुंचाना पूरी तरह से तर्कहीन है। उन्होंने आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में अब एक सिलेंडर की कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है, जबकि मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी दाम 3,000 के आंकड़े को पार कर चुके हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इस वृद्धि का सीधा प्रहार उन छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा जो पहले से ही आर्थिक मंदी और महंगाई की दोहरी मार झेल रहे हैं।
मनोज तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पहले से ही संसाधनों की उपलब्धता सीमित है और परिवहन लागत अधिक होने के कारण व्यापार चलाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में गैस सिलेंडर के दामों में इतनी बड़ी वृद्धि स्थानीय ढाबा संचालकों और होटल मालिकों की कमर तोड़ने का काम करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के हितों की अनदेखी कर केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियां बना रही है।
आंदोलन की चेतावनी
विधायक ने आगाह किया कि गैस की बढ़ती लागत के चलते होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को मजबूरन अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ेंगे, जिसका अंतिम बोझ आम जनता की जेब पर ही पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मूल्य वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और छोटे व्यवसायों को राहत देने के लिए सब्सिडी प्रदान की जाए। तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी निर्णय पर शीघ्र पुनर्विचार नहीं किया तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने सभी व्यापारियों से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।


