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Almora : साक्ष्यों के अभाव में निरस्त हुई जिला सहकारी बैंक के विरुद्ध की गई शिकायत

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साल 2017 में खाते से 1.99 लाख की निकासी का चर्चित मामला

पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया शिकायतकर्ता

एडवोकेट रोहित कार्की की प्रबल पैरवी

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग अल्मोड़ा ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में उपभोक्ता द्वारा जिला सहकारी बैंक के विरूद्ध उपभोक्ता द्वारा बगैर जानकारी के बैंक खाते से 1.99 लाख रूपयों के आहरण के संबंध में की गई शिकायत को निरस्त कर दिया है।

ज्ञात रहे कि शिकायतकर्ता प्रकाश चंद्र पाण्डे पुत्र चिंतामणि निवासी ग्राम धुरासंग्रोली पोस्ट चायखान अल्मोड़ा ने शाखा प्रबंधक जिला सहकारी बैंक लमगड़ा व प्रबंधक जिला सहकारी बैंक अल्मोड़ा के विरुद्ध एक शिकायती वाद उसके ऋण खाता से 10 नवंबर, 2017 को निकाली गई धनराशि रुपया 01 लाख 99 हजार मय ब्याज व मानसिक क्षति के रूप में रुपया बीस हज़ार दिलवाए जाने हेतु प्रस्तुत किया था। जिसमें शिकायतकर्ता ने साक्ष्य के रूप में विपक्षी को लिखे पत्रों की प्रतियां तथा अन्य संबंधी लिखे पत्र व बैंक स्टेटमैंट की प्रतियां प्रस्तुत की।

विपक्षीगण की ओर से शपथपत्र फेहरिस्त में एकाउंट ओपनिंग फार्म की प्रति और डेबिट वाउचर की प्रति प्रस्तुत की गई। बहस के दौरान विपक्षी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि शिकायकर्ता का उक्त खाता क्रेडिट ऋण से संबंधित है। क्रेडिट ऋण से शिकायतकर्ता द्वारा लगातार लेन—देन किया जाता रहा है। विवादित धनराशि 10 नवंबर, 2017 को शिकायतकर्ता के खाते से चैक के माध्यम से आहरित हो चुकी थी, परंतु उनके द्वारा एक साल के बाद 15, दिसंबर, 2018 को पहली बार विपक्षी के समक्ष यह बात रखी, जबकि इस दौरान उसके क्रेडिट ऋण खाते से लगातार लेन—देन किया जाता रहा जिसकी इंट्री स्टेटमेंट में दर्ज है।

विपक्षीगण के अधिवक्ता द्वारा आयोग का ध्यान पत्रावली पर उपलब्ध खाता खोलने के पपत्र व डेबिट वाउचर की ओर आकर्षित किया गया। जिसके पीछे वाले भाग पर किए गए हस्ताक्षरों का मिलान करने पर स्पष्ट होता है की वो एक ही व्यक्ति द्वारा किए गए हैं। बहस के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा चैक बुक से संबंधित कोई भी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही किसी प्रथम सूचना रिपोर्ट और न ही भारतीय रिजर्व बैंक को दिए कोई शिकायत संबंधी दस्तावेज़ ही प्रस्तुत किए। उपरोक्त समस्त के आधार पर आयोग की राय में शिकायतकर्ता इस तथ्य को सिद्ध करने में असफल रहा कि उसके हस्ताक्षरों से उक्त धनराशि आहरित नहीं की गई थी, जबकि दस्तावेजों के मिलान से स्पष्ट होता है कि बैंक से जो धनराशि निकाली गई वह उन्ही ने निकाली है।

उनके द्वारा सभी दस्तावेजों में अंग्रेज़ी में हस्ताक्षर किए गए हैं, जिससे यह माना जा सकता है कि वह शिक्षित व्यक्ति हैं। इसलिये उनका यह तर्क कि बैंक द्वारा उससे सादे कागज में हस्ताक्षर करवा लिऐ थे, माने जाने योग्य नही हैं। आयोग द्वारा आदेश में शिकायतकर्ता की शिकायत को निरस्त कर दिया गया। आदेश अध्यक्ष, जिला आयोग अल्मोड़ा मलिक मजहर सुल्तान ने जारी किए। निर्णय में सदस्य सुरेश चन्द्र कांडपाल व विद्या बिष्ट के हस्ताक्षर हैं। विपक्षीगण की ओर से मामले में प्रबल पैरवी एडवोकेट रोहित कार्की द्वारा की गई।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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