स्वास्थ्य पखवाड़े में गंदगी का ‘दाग’
एक अदद सफाई कर्मी के लिए आउटसोर्सिंग का इंतजार
— अनूप सिंह जीना —
नैनीताल। एक तरफ जहां पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य पखवाड़ा जोर-शोर से मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ नैनीताल जिले का सुयालबाड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अपनी बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। दरअसल, इस महत्वपूर्ण अस्पताल में एक भी सफाई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है, जिसके चलते परिसर में जगह-जगह गंदगी और कूड़े का अंबार लगा है। यह स्थिति सरकार के स्वास्थ्य दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

स्थानीय नागरिकों और यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों का कहना है कि अस्पताल परिसर में गंदगी देख उन्हें निराशा होती है। उनका तर्क है कि अस्पताल ऐसी जगह है, जहां संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए यहां सफाई की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। इसके बावजूद, सीएचसी सुयालबाड़ी में चारों ओर फैली गंदगी को देखकर ऐसा लगता है कि यहां का माहौल ही लोगों को बीमार कर देगा।
सीएमओ ने दिया आउटसोर्सिंग का हवाला
इस गंभीर समस्या के बारे में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नैनीताल से पूछा गया, तो उन्होंने सफाई कर्मचारी की नियुक्ति न होने का कारण आउटसोर्सिंग बताया। उन्होंने कहा कि सरकार जब आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्ति करेगी, तभी सफाई कर्मी की तैनाती हो पाएगी।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता
सवाल यह है कि एक ओर सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर एक महत्वपूर्ण हाईवे पर स्थित इतने बड़े अस्पताल में एक अदद सफाई कर्मचारी तक की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। हैरानी की बात तो यह है कि न तो सत्ता पक्ष के लोग और न ही प्रशासन के उच्च अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान दे रहे हैं।

दोगुना है सीएचसी सुयालबाड़ी का महत्व
सुयालबाड़ी सीएचसी (CHC Suyalbari) का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों की सीमा पर स्थित है। यहां दोनों जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। इसके अलावा, हाईवे पर स्थित होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को भी यहीं लाया जाता है।

कर्मचारी निभा रहे ‘सफाईकर्मी’ का भी फर्ज
फिलहाल, इस अस्पताल में कार्यरत अन्य कर्मचारियों को ही सफाई का काम भी देखना पड़ रहा है। उन्हें अपनी नियमित ड्यूटी के अलावा बरामदे और कमरों की सफाई खुद ही करनी पड़ती है, जो उनके लिए एक अतिरिक्त बोझ है। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों पर दबाव डाल रही है, बल्कि अस्पताल की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर रही है।

