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किच्छा न्यूज : भाजपा उद्योगपतियों के फायदे के लिए लाई है कृषि बिल-पनेरू

किच्छा। उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव हरीश पनेरू ने किसान बिल के विरोध में कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने तथा अनाज का भंडारण करने की छूट देकर कालाबाजारी को बढ़ावा देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार किसान विरोधी सरकार है तथा हिटलरशाही तरीक़े से अध्यादेश लाकर क़ानून बनाने का काम कर रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के उस बयान पर पलटवार करते हुए पनेरू ने कहा जिसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। पनेरू ने कहा कि आख़िर देश की जनता एवं किसान जानना चाहते हैं कि ऐसी कौन सी मजबूरी तथा इतना महत्वपूर्ण क्या था कि कोरोना काल व लॉक डाउन के कारण पार्लियामेंट में सदन कार्रवाई ना होने के बावजूद भाजपा सरकार इस अध्यादेश को लेकर आई ? पनेरु ने केंद्र सरकार द्वारा पिछले दरवाजे से अध्यादेश को लाने का कारण पूछते हुए कहा कि पूरे देश में ढिंढोरा पीटने वाली मोदी सरकार जिसने ताली-थाली, नोटबंदी, जी॰एस॰टी, बालाकोट आदि मामलों को लेकर जमकर ढिंढोरा पीटने का काम किया, जबकि किसान बिल पर बिना सवाल-जवाब के ही अध्यादेश को पारित कराने में जल्दबाजी दिखाई। पनेरू ने कहा कि किसान पहले से एम॰एस॰पी/ न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने का क़ानून बनाने की माँग कर रहे हैं परंतु केंद्र सरकार उस मांग को पूरा नहीं कर रही है, जिसका उदाहरण बिहार जैसे राज्य में देखने को मिला है जहां 1760 रुपए में बिकने वाली मक्का को किसान मात्र 850 रुपए से 900 रुपए में बेचने को मजबूर है । उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार देश के किसानों को गुमराह करने का काम कर रही है कि देश का किसान इस अध्यादेश के बाद कहीं भी अपनी फसल बेच सकता है,जबकि यह व्यवस्था तो पूर्व में भी लागू है, देश में ऐसा कोई नियम नहीं है कि किसान वर्तमान में निश्चित जगह पर ही अपनी फसल को बेच सकता है, फिर फसल बेचने के नाम पर किसानों को गुमराह क्यों किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि आपदा क़ानून की आड़ में केंद्र सरकार इस बिल के माध्यम से बड़े कारोबारियों को फ़ायदा देना चाहती है जिसमें अनलिमिटेड भंडारण करने का प्राविधान है तथा मंडी सिस्टम को खतम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अध्यादेश के आने के बाद उद्योगपति ओने पौने दामों में किसानों की फसल को खरीद कर उसका भंडार करेंगे और महंगे दामों पर बेचेंगे, जिससे सामान कि कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा।

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