अल्मोड़ा। एनआरएचएम उत्तराखंड के पूर्व उपाध्यक्ष बिट्टू कर्नाटक इस बीच जनसरोकारों से जुड़ी समस्याओं को उठा रहे हैं। उन्होंने इस बार आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों एवं सहायिकाओं के दुखड़े को उजागर किया है। कई आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों व सहायिकाओं से कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए किए जा रहे कार्यों में सहयोग लिया जा रहा है, मगर उन्हें न तो जरूरी सामग्री दी गई और न ही उन्हें कोरोना वाॅरियर्स घोषित किया गया। अब उनके लिए नया फरमान है कि वे कोरोना संक्रमण के दौर में घर-घर जाकर बच्चों का वजन लेंगी। इसी मुद्दे पर श्री कर्नाटक ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर उन्हें सुविधाएं देने तथा यह नया आदेश निरस्त करने का अनुरोध किया है।
जिलाधिकारी के माध्यम से सीएम को भेजे ज्ञापन में कहा है कि मौजूदा कोरोना संक्रमण काल में प्रदेश की कई आंगनबाडी कार्यकर्तियों एवं सहायिकाओं को प्रवासियों की देखरेख और उन्हें क्वारंटाइन कराने के कार्य में लगाया है। मगर हालात ये हैं कि इन कार्यों में लगी कार्यकत्र्रियों को सरकार ने मास्क, ग्लब्ज, सैनिटाईजर आदि की सुविधा तक नहीं दी गयी है। कार्य में लगातार सहयोग देने के बावजूद उन्हें कोरोना वारियर्स तक घोषित नहीं किया गया है। अब सरकार का इनके लिये नया फरमान आ चुका है कि ये इस कोरोना संक्रमण काल में घर-घर जाकर छह माह से छह साल तक की उम्र के बच्चों का वजन लेंगी। पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा कि एक तरफ सरकार सामाजिक दूरी के नियम का हवाला दे रही है, दूसरी तरफ बच्चों के वजन लेने का आदेश निर्गत कर स्वयं ही इस नियम को तोड़ने जैसा कार्य कर रही है। यदि किसी कर्मचारी या किसी बच्चे में कोरोना के लक्षण होते हैं, तो घर-घर जाकर वजन लेने के कारण कई परिवार संक्रमित हो सकते हैं। ऐसी आशंका ज्ञापन में व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि इसी आशंका के कारण केन्द्र सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों को बन्द रखा है।
श्री कर्नाटक ने कहा है कि वर्तमान में देश में तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है और इससे पर्वतीय क्षेत्र भी अछूते नहीं हैं। ऐसे में घर-घर जाकर बच्चों का वजन लेने का कार्य जनहित में उचित नहीं है। उन्होंने परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए तत्काल इस आदेश को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने आंगनबाडी केन्द्रों को मास्क, ग्लब्ज, सैनिटाईजर, थर्मल स्क्रीनिंग डिवाइस, सैनिटाईजिंग मशीन, हाइपो साल्यूशन, पीपीई किट आदि जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। साथ ही इन कर्मचारियों का बीमा कर इन्हें सामग्री संचालन व प्रयोग का प्रशिक्षण प्रदान करने और आंगनबाडी केन्द्रों की कर्मचारियों को भी कोरोना वारियर्स घोषित करने की मांग की है, ताकि वे पूर्ण मनोबल से कार्य कर सकें। उनके मानदेय में भी तत्काल यथोचित वृद्वि करने की मांग की है।
अल्मोड़ाः आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों की आवाज बने बिट्टू कर्नाटक, दुखड़ा मुख्यमंत्री तक पहुंचाया
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