HomeUttarakhandAlmoraबिमौला की पुण्यभूमि पर महायोग का संगम, भगत जी महाराज बने महामंडलेश्वर

बिमौला की पुण्यभूमि पर महायोग का संगम, भगत जी महाराज बने महामंडलेश्वर

ADVERTISEMENTS

सीएनई रिपोर्टर

अल्मोड़ा/हवालबाग : देवभूमि उत्तराखंड के पावन कोसी तट स्थित श्री मां तुंगेश्वरी तीर्थधाम, बिमौला में अध्यात्म और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला जब संत महापुरुष श्री श्री 1008 ऋषिवर भगत जी महाराज का भव्य स्वागत व अभिनंदन समारोह संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम उन्हें 28 अगस्त को श्री वृंदावन में आयोजित अंतरराज्यीय संत पट्टाभिषेक समारोह में “महामंडलेश्वर” की गरिमामयी उपाधि से विभूषित किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

🔴 BREAKING: खनन कारोबारी का खौफनाक गुस्सा! रेट विवाद में प्रतिद्वंद्वी का क्या हाल किया? (देखें वीडियो)

भोर से ही तीर्थधाम में भक्तों का तांता लगना प्रारंभ हो गया। प्रातः पूजन, सुंदरकांड पाठ, हवन, एवं भजन संकीर्तन के मधुर स्वर वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। भक्तों के सामूहिक सहयोग से एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

उल्लेखनीय उपस्थिति:

इस दिव्य आयोजन की शोभा बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सप्त ऋषि अखाड़ा परिवार के प्रमुख संतों व गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से –

  • ऋषिवर कैलाशानंद महाराज (वरिष्ठ महामंडलेश्वर)
  • ऋषिवर कृष्णचंद्र काण्डपाल (अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता)
  • धर्माचार्य आचार्य लोकेश महाराज
  • पूर्व विधायक कैलाश शर्मा
  • नवीन जोशी, लाल सिंह लटवाल, उमेद सिंह कनवाल, आचार्य नवीन चंद्र पंत एवं अन्य अनेक जनप्रतिनिधिगण, संतजन व भक्तगण प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

एक ऐतिहासिक क्षण:

भगत जी महाराज को “महामंडलेश्वर” की उपाधि मिलना न केवल बिमौला क्षेत्र बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। उनका जीवन, समाज व सनातन धर्म के प्रति समर्पण और निःस्वार्थ सेवा, आज की पीढ़ी के लिए एक जीवंत प्रेरणा है।

इस अवसर पर ऋषिवर कृष्णचंद्र काण्डपाल (अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता) ने भगत जी महाराज के व्यक्तित्व, उनकी तपस्या, साधना और सेवा भावना की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए उन्हें “धर्मध्वजा के अमिट वाहक” की संज्ञा दी।

वास्तव में यह आयोजन न केवल एक संत का सम्मान था, बल्कि यह लोक व धर्म की एक महान परंपरा का उत्सव था — एक ऐसा उत्सव जो आने वाली पीढ़ियों को अध्यात्म की राह दिखाता रहेगा।

ADVERTISEMENTS
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments