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Bank Strike : बैंकों पर ताले, सड़कों पर कर्मी—गढ़वाल से कुमाऊं तक गूंजा विरोध का स्वर

पांच दिवसीय बैंकिंग, पीएलआई में भेदभाव खत्म करने समेत मांगों को लेकर एकजुट हुए कर्मचारी

नैनीताल में करीब 125 करोड़ का लेनदेन प्रभावित, 28 सितंबर से फिर तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी

CNE REPORTER, देहरादून/नैनीताल/रुद्रपुर/कोटद्वार। Bank Strike : बैंकों पर ताले, सड़कों पर कर्मी—गढ़वाल से कुमाऊं तक गूंजा विरोध का स्वरबैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को उत्तराखंड में बैंक कर्मचारियों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के आह्वान पर प्रदेशभर में सरकारी और निजी बैंकों के कर्मचारी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहा और कर्मचारी हाथों में बैनर-तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखाई दिए।

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Bank Strike : बैंकों पर ताले, सड़कों पर कर्मी—गढ़वाल से कुमाऊं तक गूंजा विरोध का स्वर का सबसे बड़ा असर बैंकिंग लेनदेन पर पड़ा। नैनीताल में ही बैंक कर्मचारी संघ के अनुसार एक दिन में करीब 125 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक शाखाओं के बंद रहने से नियमित बैंकिंग सेवाएं ठप रहीं और नगदी सहित विभिन्न बैंकिंग कार्यों के लिए ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि एटीएम के माध्यम से नगदी निकासी का विकल्प उपलब्ध रहा, लेकिन शाखाओं से जुड़े अनेक काम पूरी तरह प्रभावित रहे।

देहरादून में हजारों बैंककर्मियों ने बुलंद की आवाज

राजधानी देहरादून में बैंक कर्मचारियों ने एश्ले हॉल चौक पर एकत्र होकर जोरदार प्रदर्शन किया। करीब चार हजार बैंक अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल में शामिल होने का दावा किया गया। कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर सरकार और संबंधित स्तर पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करना, बैंक कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का समाधान, सेवा संबंधी मुद्दों पर निर्णय तथा परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) में कथित भेदभाव समाप्त करना शामिल रहा।

बैंककर्मियों का कहना था कि जब बैंकिंग क्षेत्र लगातार तकनीक और उत्पादकता के नए मानकों पर काम कर रहा है, तब कर्मचारियों को सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था से वंचित रखना तर्कसंगत नहीं है। उनका कहना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था से कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिलेगा और कार्यक्षमता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उत्तराखंड में बैंक कर्मचारियों के आंदोलन ने यह संकेत भी दे दिया है कि मामला महज एक दिन की हड़ताल तक सीमित रहने वाला नहीं है।

उत्तरांचल बैंक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रवीण साह ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। कर्मचारियों के अनुसार 28 सितंबर से तीन दिवसीय हड़ताल प्रस्तावित है। इसके बाद भी यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया जा सकता है।

नैनीताल में करीब डेढ़ दर्जन शाखाओं का काम ठप

सरोवरनगरी नैनीताल में भी हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दिया। शहर की करीब डेढ़ दर्जन बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहा। सरकारी और निजी बैंकों के कर्मचारी मल्लीताल स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा के समीप एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग उठाई।

उत्तरांचल बैंक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रवीण साह ने कहा कि कर्मचारियों के आंदोलन का केंद्र मुख्य रूप से पीएलआई और पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था है। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ कार्यकारी स्तर के कर्मचारियों को इंसेंटिव का लाभ मिल रहा है, जबकि निचले स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को इससे बाहर रखा गया है। उन्होंने इसे कर्मचारियों के बीच अन्यायपूर्ण भेदभाव बताया।

साह के मुताबिक नैनीताल में एक दिन की बैंक हड़ताल से करीब सवा सौ करोड़ रुपये का बैंकिंग लेनदेन प्रभावित हुआ।

प्रदर्शन में अभिषेक अधिकारी, रमेश बिष्ट, शिखर साह, राधा खनका, लीला आर्या, ममता बजावल, प्रियंका पंत, संजय बोरा, कमल गोस्वामी, अतुल साह, अंकित सिंह, विनोद बाल्मीकि, नीरज तिवारी सहित बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।

रुद्रपुर में मांगों का चार्ट लेकर निकला जुलूस

ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में भी बैंक हड़ताल (Bank Strike) का असर साफ दिखाई दिया। यूएफबीयू के आह्वान पर विभिन्न बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा के सामने एकत्र हुए। हाथों में मांगों से संबंधित बैनर और तख्तियां लिए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

इसके बाद बैंककर्मियों ने शहर के प्रमुख स्थानों और विभिन्न बैंक शाखाओं के सामने जुलूस निकालकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, 11वें और 12वें द्विपक्षीय समझौतों को लागू करने, पेंशन अपडेशन, पुरानी पेंशन बहाल करने तथा लंबित मांगों का समाधान करने की मांग उठाई।

साथ ही प्रॉफिट लिंक्ड इंसेंटिव में किसी भी तरह के भेदभाव को समाप्त करने की आवाज बुलंद की गई।

सभा को संबोधित करते हुए गिरीश चंद्र जोशी ने कहा कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब सरकार को इस आंदोलन को गंभीरता से लेना चाहिए। समीर राय ने आंदोलन को और व्यापक बनाने की बात कही, जबकि मोहन जोशी ने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की एकजुटता को आंदोलन की ताकत बताया।

विकास शर्मा ने लंबित समझौतों और आदेशों को लागू करने की मांग उठाई। आरके छावड़ा और तुलाराम ने भी कर्मचारियों से एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।

कोटद्वार में भी बैंक शाखाओं का कामकाज प्रभावित

कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों में भी बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। पंजाब नेशनल बैंक की बद्रीनाथ मार्ग स्थित शाखा के समीप बैंककर्मियों ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। यहां भी 28 सितंबर से तीन दिन की हड़ताल और इसके बाद अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दोहराई गई।

एक दिन की हड़ताल, लेकिन सरकार के लिए बड़ा संकेत

बैंक कर्मचारियों की शुक्रवार की हड़ताल भले ही एक दिन की रही हो, लेकिन प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इसका व्यापक असर दिखाई दिया। बैंक शाखाओं के बंद रहने से जहां ग्राहकों को परेशानी हुई, वहीं बड़ी मात्रा में बैंकिंग लेनदेन भी प्रभावित हुआ।

कर्मचारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक दिन की कार्रवाई नहीं बल्कि लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान के लिए दबाव बनाने की कोशिश है। उनके तेवरों से साफ है कि यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो सितंबर के अंत में आंदोलन का अगला चरण और अक्टूबर में अनिश्चितकालीन हड़ताल बैंकिंग व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

गढ़वाल और कुमाऊं में एक साथ उठी बैंककर्मियों की आवाज ने सरकार के सामने अब गेंद उसके पाले में डाल दी है—मांगों पर बातचीत और समाधान होगा या फिर बैंकिंग व्यवस्था को लंबे आंदोलन का सामना करना पड़ेगा, इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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