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उत्तराखंड : यूपी में सर तन से जुदा, उत्तराखंड में जिंदा होकर मिलने का वादा

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के करछना में विगत 10 दिसंबर को अधिवक्ता आशीष दीक्षित की हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपी का कहना है कि उसने तंत्र सिद्धी के जरिये अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए आशीष के कहे अनुसार ही उसकी हत्या की है। पुलिस भी इस घटना से हैरान है।

इसे सनक कहें, अंधविश्वास कहें या मूर्खता की हद। एक शख्स अपने साथी से कहता है कि तुम मेरी गर्दन काट डालो, मैं जिंदा होकर तुमसे उत्तराखंड में मिलूंगा। फिर उसका सर धड़ से जुदा तो हो जाता है, लेकिन वह जिंदा नहीं होता। मारने वाला उसे उत्तराखंड में तलाशता है, लेकिन देव भूमि में उसे उसका मृतक साथी नहीं पुलिस मिलती है। जो उसे उठा ले जाती है और कत्ल के मुकदमे में जेल भेज देती है।

यह है हत्या की विचित्र कहानी

यह कहानी शुरू होती है देवभूमि उत्तराखंड की तीर्थ नगरी हरिद्वार से। आज से लगभग छह माह पूर्व यूपी के प्रयाग राज का एक 37 वर्षीय युवक आशीष दीक्षित हरिद्वार में गंगा स्नान को पहुंचता है। यहां उसकी मुलाकात हर की पौड़ी में नीतीश सैनी निवासी निरंजनपुर हरिद्वार नामक युवक से होती है। यह नीतीश एक सामान्य परिवार से है और तंत्र-मंत्र में आस्था रखता है। इसकी दिली इच्छा थी कि वह भविष्य में एक अमीर आदमी बन जाये।

आशीष दीक्षित ने तंत्र-मंत्र और सिद्धियों की बातों में उलझाया

इस मुलाकात के बाद आशीष और नीतीश की पूजा-पाठ और सिद्धियों को लेकर आपस में चर्चा हुई। आशी ने कहा कि वह तंत्र-मंत्र जानता है और वह चाहे तो नीतीश का जीवन बदल सकता है। तंत्र साधना से हर असंभव काम हो सकता है। उसकी बातों में आकर नीतीश ने अपनी नौकरी और घर तक छोड़ दिया। फिर नीतीश आशीष के साथ हरिद्वार से वाराणसी पहुंचा। उसके बाद कानपुर, लखनऊ, आगरा होते हुए प्रयागराज में रूक गया।

यू ट्यूब में दिखाई महाभारत की एक कहानी

नीतीश का कहना है कि गत 08 दिसंबर को वह दोनों विंध्यवासिनी मां का दर्शन करने मिर्जापुर गए। जब वह लौटे तो आशीष ने कहा था कि उसे मां की कृपा से अनोखी सिद्धि मिली है। इस दौरान उसने कहा कि यदि नीतीश उसकी गर्दन काट दे तो दोबारा जीवित हो उठेगा। जिसके बाद उसे सारी सिद्धियां मिल जायेगी और वह फिर नीतीश का जीवन बदल देगा। अपनी बात को साबित करने के लिए उसने यूट्यूब में महाभारत में बर्बरीक की कहानी को दिखाया। जिसमें दिखाया गया है कि गर्दन कटने के बाद वह कैसे जीवित हो उठा था। यही नहीं, उसने नीतीश से कहा कि मैं पूजा करूंगा। फिर लौट कर लेट जाऊंगा। यदि मेरे शरीर में कोई हलचल नहीं हुई तो तुम मेरी गर्दन काट देना। जो रक्त प्रवाहित होगा, उसे अपने माथे पर लगाकर अभिषेक कर लेना।

कत्ल के बाद यह विधि करने को किया प्रेरित

आशीष ने यह भी कहा कि जब उसकी गर्दन कट जाये तो मंत्रोचार कर उस चापड़ (धारदार हथियार) की पूजा करना। फिर पूजा की सामग्री को गंगा नदी के मुहाने पर गाड़ देना। फिर तुम प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर आना। वह दोबारा जिंदा होकर एक घंटे में वहां पहुंच जायेगा। यदि किसी कारण व से वह तब तक नहीं आया तो तुम (नीतीश) हरिद्वार चले जाना। मैं तुम्हें वहीं मिल जाऊंगा। मैं (आशीष) मरने के बाद मां कामाख्या देवी के पास जाऊंगा और जीवित होकर हरिद्वार पहुंच जाऊंगा।

फिर हुआ सर तन से जुदा करने का खेल

पुलिस गिरफ्त में नीतीश ने बताया कि उस दिन आशीष ने पहले शराब पी और कोई दवा पीकर अपनी जैकेट व टी-शर्ट खोली। जिसके बाद वह लेट गया। उसके शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी। उसने आशीष को उलट-पलट कर भी देखा। इसके बाद उसने आशीष के कहे मुताबिक चापड़ से उसकी गर्दन अलग कर दी। फिर चापड़ की पूजा की और पूजन सामग्री को गंगा में प्रवाहित किया। जब घंटे भर इंतजार के बाद भी आशीष नहीं पहुंचा तो वह हरिद्वार चला आया।

पुलिस ने किया यह खुलासा

पुलिस उपायुक्त यमुना नगर सौरभ दीक्षित ने बताया कि प्रयागराज के नैनी के नंदन तालाब के रहने वाले आशीष दीक्षित की सिर कटी लाश गत 10 दिसंबर मिली थी। घटनास्थल प्रयागराज-मिर्जापुर हाईवे पर मर्दापुर गांव था। जहां तालाब के किनारे झाड़ियों में यह लाश बरामद हुई थी। मृतक गत 09 दिसंबर को अपने आरोपी नीतीश सैनी के साथ वहां गये थे। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से उसे ढूंढ निकला। एसओजी टीम ने नीतीश को हरिद्वार से गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार मृतक आशीष ने अपना एक राजनीतिक दल भी बनायाय था। इस दौरान उसने बहुत से लोगों से कर्जा लिया था, जो लगभग 35 लाख रूपये था। वह कर्जा नहीं चुका पा रहा था इसलिए मई माह में भाग कर हरिद्वार चला गया और साधु का वेष बना लिया। फिर हरिद्वार ही रहने लगा, जहां उसकी 22 साल के नीतिश सैनी से मुलाकात हुई थी। फिर यह सब घटनाक्रम हुआ।

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Deepak Manral
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तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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