उत्तराखंड : एक आई.पी.एस. ने बदल दी जनता की सोच ! पढ़िये, यहां अपने सगे संबंधियों से भी ज्यादा क्यों खाकी पर भरोसा कर रही है जनता…..
अल्मोड़ा। आम तौर पर समाज में खाकी की जो छवि बन चुकी थी, उसे बदलना कोई आसान काम नही कहा जा सकता। यहां वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा ने कोरोना काल में जो कुछ किया उसने न केवल समाज की पुलिस के प्रति सोच को बदल दिया, बल्कि पुलिस अधिकारियों व कार्मिकों को ड्यूटी के मानवीय पहलुओं से भी रूबरू करवा दिया है।
यह एसएसपी मीणा की प्रेरणा ही है कि इस कोरोना काल में प्रत्येक थाने के अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा किसी न किसी तरीके से असहाय गरीब, हर फरियादियों की पर मदद की जा रही है। माह मई में चौकी प्रभारी मासी सुनील धानिक एवं चौकी प्रभारी खीड़ा फिरोज आलम द्वारा एक कदम मानवता की ओर बढ़ाते हुए संयुक्त रूप से जरूरन्तमन्दों की मदद हेतु ‘कोई भूखा ना सोये, कोई भूख से ना रोये पहल’ का शुभारम्भ किया गया। जिसके अन्तर्गत लगातार किसी न किसी रूप में इनके द्वारा जरूरतमन्दों की मदद की जा रही है। दूरस्थ क्षेत्रों में निर्धन असहाय, जरूरतमन्दों तथा जरूरतमन्द प्रवासियों को चिहिन्त करते हुए गांव-गांव, घर-घर जाकर 45 परिवारों को राशन उपलब्ध कराया गया। इसके बाद अब अपनी टीम के सदस्य कानि प्रदीप, अनिल धामी, अशोक, गोविन्द, अनुज त्यागी ने 13 दूरस्थ गांवों (खजुरानी, पाखाखरिक, खीड़ा, पुनियाबागड़, बगडी, अमस्यारी, कोटयूड़ा,झुडंगा, डांग, थापला, कनरे, भटोली, डोबरी ) का भ्रमण कर ऐसे 30 एकल बुजुर्गों को चिन्हित किया जो अकेले रहकर जीवनयापन कर रहे हैं। इसके उपरान्त लगभग 04-05 किलोमीटर तक पैदल पहाड़ी नापते हुए अल्मोड़ा पुलिस अपने कन्धे में राशन, मन में प्यार लेकर एकल बुजुर्गों के द्वार पहुंची तथा उनके स्वास्थ, एवं कुशलता से रूबरू हुए। उन्हेें राशन, दैनिक खाद्य सामग्री आदि उपलब्ध कराया गया। 6 बुजुर्गों द्वारा बताया गया कि उनकी दवाईयां चल रही हैं, समाप्त होने पर बतायेगें। सभी बुजुर्गों को समझाया गया कि वे साफ-सफाई का ध्यान रखें। उन्हे किसी भी प्रकार की चाहे वह खाद्य सामग्री की हो या स्वास्थ्य से सम्बन्धित वो अपने ग्राम प्रधान को अवगत करायें तथा ग्राम प्रधान से आग्रह किया कि वे समस्या से उन्हे बता सकते हैं। तत्काल हर सम्भव मदद के लिए अल्मोड़ा पुलिस तत्पर है।
अल्मोड़ा पुलिस का यह रूप कन्धे में राशन, मन में प्यार लेकर उनके द्वार पर पहुंचते ही हर बुजुर्ग भावुक हो उठे एवं अल्मोड़ा पुलिस को गले से लगाकर खूब रोये और खाकी में अपने बच्चों का रूप देखकर खूब आर्शिवाद दिया। कहा कि ”खुश रया, अमर रया, सफल होया य काम में।”