सन्नाटे में डूबी महत्वाकांक्षाएं: जब एक MBA छात्र ने ओढ़ ली खामोशी

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गरमपानी: पुलिस की चालानी कार्रवाई के बाद युवक ने की आत्महत्या
गरमपानी: पुलिस की चालानी कार्रवाई के बाद युवक ने की आत्महत्या

लेफ्टिनेंट कर्नल के बेटे का सुसाइड केस

लामाचौड़ स्थित आम्रपाली कॉलेज से कर रहा था MBA

CNE REPORTER, हल्द्वानी : कमलुवागांजा इलाके की गलियों में आज एक अजीब सी भारीपन है। यहाँ एक घर की दहलीज पर रखी खुशियाँ उस वक्त मातम में बदल गईं, जब एक माँ ने अपने लाडले को पुकारने के लिए कमरा खोला, लेकिन सामने उसकी आवाज़ नहीं, बल्कि एक डरावनी खामोशी लटकी हुई थी। आम्रपाली कॉलेज लामाचौड़ से MBA कर रहे 22 वर्षीय दिनेश माहरा का भविष्य सुनहरी उम्मीदों से भरा था। पिता असम राइफल्स में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन घर के भीतर भावनाओं के मोर्चे पर एक युवक हार गया।


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इसी नीले ड्रम में फंदा डाल दे दी जान

सोमवार की रात हुई एक मामूली ‘पारिवारिक बहस’ शायद दिनेश के मन पर इतना गहरा घाव कर गई कि उसने रात के अंधेरे में ही मौत का रास्ता चुन लिया। वह रात का खाना खाकर अपने कमरे में तो गया, लेकिन उसकी रूह ने अगली सुबह का सूरज देखने से इनकार कर दिया।

एक माँ की ममता और वो नीला ड्रम

कल्पना कीजिए उस माँ की, जो सुबह अपने बेटे को जगाने गई थी। सीढ़ियों के पास रखे गेहूं के उस नीले ड्रम को देखकर शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वह एक जीवन के अंत का गवाह बनेगा। दिनेश का शरीर वहां रस्सी के सहारे झूल रहा था।

  • दोहरे दर्द की दास्तां: पुलिस की जांच बताती है कि दिनेश ने मरने से पहले अपने हाथ की नस काटने की कोशिश की थी। हाथ पर मिले दो निशान इस बात के गवाह हैं कि वह युवक कितनी गहरी मानसिक उथल-पुथल और पीड़ा से गुजर रहा था।
  • हंसमुख मुखौटा: माँ कुसुम माहरा की रुलाई थम नहीं रही। उनका कहना है कि दिनेश हमेशा हंसता रहता था। यही सबसे बड़ा सवाल है— आखिर उस हंसी के पीछे कौन सा तूफान छिपा था जिसे घर वाले भी नहीं पढ़ पाए?

एक विश्लेषण: ‘सब ठीक है’ के पीछे का सच

दिनेश तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था। अक्सर घर के सबसे छोटे सदस्य को सबसे ज्यादा लाड़ मिलता है, लेकिन शायद वही सबसे ज्यादा अकेला भी महसूस कर रहा था।

सवाल यह नहीं है कि उसने ऐसा क्यों किया, सवाल यह है कि हमारे युवा अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के बजाय खामोश हो जाना बेहतर क्यों समझ रहे हैं?

पुलिस ने दिनेश का मोबाइल जब्त कर लिया है। वे डिजिटल सुराग ढूंढ रहे हैं, लेकिन क्या कोई भी तकनीक उस ‘अंतिम विचार’ को डिकोड कर पाएगी जिसने एक होनहार छात्र को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया?

फिलहाल, पिता सीमा से लौट आए हैं, लेकिन अब घर की रक्षा करने वाला वह चिराग बुझ चुका है जिसे वे अफसर बनाना चाहते थे। यह घटना हमें चेतावनी देती है कि अपने आसपास के “हंसमुख” लोगों की खामोशी को भी पढ़ना सीखें।


क्या है पूरा मामला ?

हल्द्वानी के कमलुवागांजा (गिरिजा विहार) में रहने वाले 22 वर्षीय दिनेश माहरा, जो आम्रपाली कॉलेज से MBA द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे, ने मंगलवार सुबह अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके पिता असम राइफल्स में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर तैनात हैं। सोमवार रात परिजनों से हुई किसी बात पर मामूली बहस के बाद दिनेश अपने कमरे में चले गए थे। अगली सुबह जब वे बाहर नहीं आए, तो मां ने उन्हें सीढ़ियों के पास रखे एक नीले ड्रम के सहारे रस्सी से लटका हुआ पाया। पुलिस को दिनेश के हाथ पर कटने के निशान भी मिले हैं, जिससे अंदेशा है कि फंदा लगाने से पहले उन्होंने अपनी नस काटने की कोशिश की थी। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर जांच शुरू कर दी है।

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