HomeUttarakhandAlmoraअल्मोड़ा : ब्रिटिशकालीन कुष्ठ रोग आश्रम के अस्तित्व को बचाने की दरकार

अल्मोड़ा : ब्रिटिशकालीन कुष्ठ रोग आश्रम के अस्तित्व को बचाने की दरकार

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⏩ जागरूक नागरिकों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

⏩ कहा कुष्ठ रोगियों का हो रहा शोषण

⏩ जमीन व अस्पताल को खुर्द—बुर्द करने की साजिश

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

अल्मोड़ा के ऐतिहासिक कुष्ठ रोग आश्रम में तमाम अव्यवस्थाओं और ​अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए शहर के तमाम प्रतिष्ठित व जागरूक नागरिकों ने डीएम को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें वर्तमान में आश्रम का प्रशासनिक व वित्तीय प्रबंधन देख रही संस्था पर आश्रम की भूमि व अस्पताल को खुर्द—बुर्द करने के प्रयास सहित तमाम गम्भीर आरोप लगाये हैं और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि कुष्ठ रोग अस्पताल एवं आश्रम ब्रिटिश कालीन दौर से कुष्ठ रोगियों का इलाज कर उनके व उनके परिवारों को पुर्नवासित कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के कार्यों को सराहनीय एवं पूर्ण समर्पित रूप से करता आ रहा है।
संस्था के पूर्वकालीन इतिहास पर नजर डालें तो सर हैनरी रैमजे (तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर) द्वारा संचालित किया गया। बाद में लंदन मिश्नरी सोसाइटी व अंत में अमेरिकन मैथोडिस्ट मिशन की देखरेख में संस्था का संचालन किया गया।

ज्ञापन में कहा गया है कि संस्था विगत 180 वर्षों से अधिक समय से अपने उद्देश्य को बड़े ही सराहनीय तरीके से कुष्ठ रोग उन्मूलन के क्षेत्र में प्रयासरत है।
वर्तमान में उक्त संस्था का प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रबन्धन मैथोडिस्ट चर्च इण्डिया, रीजनल कार्यालय बरेली के पास है। वर्तमान प्रबन्धक के पास उक्त संस्था का कहीं भी वैधानिक पंजीकरण नहीं है। अतः संस्था में आने वाले नये एवं पुराने रोगियों की किसी भी तरह की देखभाल पिछले एक वर्ष से नहीं की जा रही है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र के एकमात्र कुष्ठ रोग अस्पताल एवं आश्रम से मिलने वाली सेवाओं से कुष्ठ रोग से ग्रसित व पीड़ित रोगियों को बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मैथोडिस्ट चर्च इन इण्डिया ने लैप्रोसी मिशन द्वारा किये जा रहे कुष्ठ उन्मूलन के कार्यों को रोक दिया गया है तथा बाहर से आने वाले कुष्ठ रोगियों को दवा नहीं दी जा रही है। गम्भीर रूप से आने वाले रोगियों को पिछले एक वर्ष से भर्ती तक नहीं किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मैथोडिस्ट चर्च इन इण्डिया उक्त भूमि व अस्पताल को खुर्द-बुर्द करने की मंशा से उक्त सभी कार्यों को बड़े ही सुनियोजित तरीके अंजाम दे रही है।

इसी के तहत संस्था के परिसर में खूबसूरत देवदार एवं अन्य हरे वृक्षों को काटने का निरन्तर प्रयास किया जा रहा है और जिन्हें कटान हेतु चिन्हित भी कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुष्ठ आश्रम में निवास कर रहे कुष्ठ रोगियों का मानसिक, शारीरिक व आत्मिक रूप से शोषण किया जा रहा है, जिसकी गुहार उनके द्वारा स्थानीय प्रशासन से लिखित व मौखिक रूप से कई बार की गई है।

उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोगियों से जबरन कार्य लिये जाने से उनके हाथ-पैरों में घाव हो गये हैं, लेकिन उनकी उचित देखभाल नहीं हो पा रही है। वर्तमान में एक कुष्ठ रोगी हिम्मत सिंह की बाथरूम में फिसल जाने की वजह से मृत्यु हो गयी, जिसका मृत्यु प्रमाण पत्र आज तक संस्था में कार्यरत डॉक्टर के द्वारा उनके परिजनों को नहीं दिया गया, जिससे उसके परिवार वाले बहुत ही दुखित हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संस्था के प्रबन्ध द्वारा एक दैनिक कार्यकर्ता को रसीद बुक देकर शहर के लोगों से, संस्थाओं से, व्यापारिक प्रतिष्ठानों आदि से असंवैधानिक रूप से धन एकत्र किया जा रहा है जिसका कुष्ठ रोगियों की देखभाल के लिए कोई उपयोग नहीं किया जा रहा है। अतः संस्था में दिये जाने वाले आय एवं व्यय का पूर्ण रूप से निरीक्षण एवं जाँच करना अति आवश्यक है। कहा कि संस्था में दिये जाने वाले राशन, सब्जी एवं फल इत्यादि का उचित भंडारन व उपयोग नहीं हा रहा है। उक्त सामान का उपयोग गैस्ट हाऊस, सिक्योरिटी गार्ड एवं कुछ कर्मचारियों द्वारा उपयोग में लिया जा रहा है जिसका निरीक्षण करने की भी आवश्यकता है।

संस्था का सम्पूर्ण प्रबन्धन (प्रशासनिक एवं वित्तीय) एक व्यक्ति विशेष को दिया गया है, जिसका किसी भी संस्था व अस्पताल चलाने का किसी भी तरह का अनुभव नहीं है, जिसकी भी विस्तृत रूप से जांच करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी संस्था की जांच कर उपजिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को दी थी, जिसमें अस्पताल की भूमि एवं सम्पत्ति को अधिग्रहण करने हेतु संस्तुति दी गयी थी। उन्होंने डीएम से आग्रह किया कि कुमाऊं क्षेत्र के एकमात्र कुष्ठ रोग अस्पताल एवं आश्रम में प्रशासन के हस्तक्षेप से एक कुष्ठ रोग विशेषज्ञ डाक्टर की नियुक्ति की जाय ताकि संस्था में आने वाले कुष्ठ रोगियों का उपचार एवं आश्रम में रहने वाले कुष्ठ रोगियों की उचित देखभाल हो सके।

यह भी मांग करी कि संस्था में चिन्हित किये गये वर्षों पुराने देवदार आदि के वृक्षों को संरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाये जायें। उक्त भूमि को खुर्द-बुर्द करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों पर ठोस कार्यवाही अमल में लायी जाये। ज्ञापन देने वालों में संरक्षक डे केयर सेंटर आनंद सिंह बगड़वाल, अध्यक्ष डे केयर हेम चंद्र जोश्ीीा, सचिव एचसी कांडपाल, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, मथुरादत्त मिश्रा, आनंद बल्लभ जोशी, देवेंद्र कुमार अग्निहोत्री, गिरीश चंद्र जोशी, गजेंद्र सिंह, त्रिलोक सिंह कड़कोटी, अध्यक्ष रेडक्रास मनोज सनवाल, डॉ. जेसी दुर्गापाल, केएस नयाल, पुष्पा कैड़ा, पीसी तिवारी आदि तमाम लोग शामिल रहे।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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