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उपलब्धि : एक छात्र से कुलपति तक का सफर, मेहनत—लगन से पाया मुकाम, विस्तार से पढ़िये।

चन्दन नेगी, अल्मोड़ा
कभी कुमाऊं विश्वविद्यालय के छात्र रहे नरेंद्र सिंह भंडारी को नवोदित सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा का प्रथम कुलपति बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। यह कुमाऊं के लिए बड़े ही गौरव का विषय और प्रेरणादायी है कि मेहनत और लगन से कई उपलब्धियां अर्जित करने के बाद आज प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी एक कुलपति जैसे बड़े दायित्व के साथ सबके सामने उभरकर आए हैं।
यहां उल्लेखनीय है कि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के अस्त्तिव में आने के बाद से ही प्रो.भंडारी के कुलपति बनने की चर्चाएं चल रही थी और इस दौड़ में कुछ अन्य लोगों के नामों की भी चर्चा रही। अंतत: प्रो. भंडारी को कुलपति बनने का गौरव प्राप्त हुआ। उत्तराखंड शासन के उच्च शिक्षा के अनुभाग-1 से उनकी कुलपति पद पर नियुक्ति का आदेश जारी हुआ है। मूल रूप से पिथौरागढ़ जनपद के नैनी—सैनी गांव निवासी प्रो. भंडारी ने अध्ययन व अध्यापन में दशकों बिताए हैं और अनेकानेक उपलब्धियां पाई हैं। नवम्बर 2017 से लेकर वर्तमान में राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य हैं। अब उनके अनुभवों का लाभ नवोदित विश्वविद्यालय को मिलेगा।
अब तक का शैक्षिक सफर :— प्रो. एनएस भंडारी ने वर्ष 1975 में पूना बोर्ड से हाईस्कूल और मिशन इंटर कालेज पिथौरागढ़ से वर्ष 1977 में इंटर की परीक्षा अव्वल स्थान पर उत्तीर्ण की। उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के पीजी कालेज पिथौरागढ़ से स्नातक व परास्नातक किया। वर्ष 1979 में बायो ग्रुप से बीएससी की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और वर्ष 1983 में रसायन विज्ञान में विशेष योग्यता के साथ परास्नातक किया। तत्पश्चात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान नई दिल्ली से पीएचडी की उपाधि पाई। इसके बाद कुमाऊं विवि के एसएसजे परिसर अल्मोडा़ मेंं वर्ष 1988 में सहायक प्रोफेसर के रूप में सेवा शुरू की। वर्ष 1998 में एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त बने और वर्ष 2009 से अकार्बनिक रसायन विज्ञान के प्रोफेसर बने। अध्ययन व अध्यापन के करीब ढाई दशक बाद उन्होंने मुकाम हासिल किया।
अध्यापन के साथ निभाए ये दायित्व :— प्रो. एनएस भंडारी ने एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में विविध प्रशासनिक कार्यों का दायित्व निभाया है। वह इग्नू स्टडी सेंटर के समन्वयक, उत्तराखंड सेंटर आफ क्लाइमेट चेंज के समन्वयक, कुमाऊं विवि के अकादमिक परिषद और फेकल्टी बोर्ड के सदस्य रहे।
अ​तिरिक्त उपलब्धियां व कार्य :— प्रो. भंडारी के राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्र पत्रिकाओं में 42 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और उन्होंने अब तक दर्जनभर आमंत्रित व्याख्यान दे चुके हैं। इनके अलावा जन विज्ञान में 3 और पर्यावरण में 2 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। उन्होंने उत्तराखंड में वर्ष 2003 से 2016 तक राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं संचार परिषद नई दिल्ली के वार्षिक कार्यक्रम राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के संगठन सचिव का दायित्व भी निभाया। प्रो. भंडारी को इकोनोमिक ग्रोथ सोसायटी आफ इंडिया नई दिल्ली से वर्ष 2011 में राष्ट्रीय विद्या सम्मान पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्होंने विज्ञान जागरूकता अभियान, पर्यावरण जागरूकता अभियान में अहम भूमिका निभाई है और पूर्व में राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं संचार परिषद नई दिल्ली के विद्यार्थियों से जुड़े विज्ञान कार्यक्रमों का आयोजन किया है।

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Deepak Manral
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तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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