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हंगामा : सेल्फ फाइनेंस के विरोध में हुआ घेराव, पूर्व निदेशक ने कही यह बात..

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं ने बीएससी पाठ्यक्रम में सेल्फ फाइनेंस को शुरू किए जाने के संदर्भ में आज विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और सोबन सिंह जीना परिसर के अधिष्ठाता छात्र प्रशासन प्रोफेसर प्रवीण बिष्ट का घेराव किया। इस दौरान छात्रों और प्रशासन के बीच काफी देर तक गर्मा गर्मी का माहौल रहा। इधर परिसर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर नीरज तिवारी ने भी सेल्फ फाइनेंस के विरोध में बयान जारी किया है।

छात्र नेताओं ने प्रशासन पर दलाली का आरोप लगाते हुए कहा की विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस कोर्स सिर्फ विद्यार्थियों को लूटने का एक माध्यम है। छात्र नेताओं ने कहा कि सेल्फ फाइनेंस में अभी तक 50 लाख शेष बचा हुआ है, परंतु उस पैसे को निर्धारित समय पर यूटिलाइज नहीं किया जाना छात्र-छात्राओं के शिक्षा के साथ खिलवाड़ है। छात्रों ने कहा कि पूर्व भी बीएससी में सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम को शुरू किया गया था, परंतु कभी भी विद्यार्थियों को प्रायोगात्मक कक्षाओं का सुचारू रूप से संचालन नहीं हो पाया।

इस दौरान छात्र नेताओं ने सेल्फ में हो रहे प्रवेशों को बंद करवाया और उनका कहना था कि सभी बच्चों को रेगुलर मोड में प्रवेश दिया जाए। छात्र नेताओं ने कहा की पिछले वर्ष रेगुलर बीएससी में 160 से 180 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया, परंतु इस वर्ष यह सभी सीट घटाकर 100 कर दी गई है, जो की गरीब और पहाड़ी परिवेश से आने वाले छात्रों के लिए धोखा है। छात्र नेताओं ने आगे कहा की शिक्षा के व्यवसायिकरण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

इधर परिसर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर नीरज तिवारी ने कहा कि उनके विचार से नव श्रृजित विश्वविद्यालय में बीएससी में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम चलाया जाना उचित एवं नियमानुकूल नहीं है। नये विश्वविद्यालय को इस उद्देश्य से प्रारम्भ किया गया है कि सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों के गरीब विद्यार्थियों को सस्ती एवं अच्छी शिक्षा प्रदान की जा सके। नये विश्वविद्यालय में सभी पाठ्यक्रमों में सीटें बढ़ाई जानी चाहिए ताकि अधिकाधिक संख्या में गरीब छात्र भी उच्च शिक्षा का लाभ उठा पायें। इसके लिए कुलपति को सरकार से शीघ्रातिशीघ्र नये पदों के श्रृजन एवं प्रयोगशालाओं हेतु अनुदान राशि प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

छात्रों से अधिक शुल्क वसूल कर स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम चलाना किसी भी प्रकार से समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता है। इसके बजाय सरकार पर दबाव बना कर सरकार से अतिरिक्त सीटों के लिए संसाधनों की मांग की जानी चाहिए। परिसर प्रशासन द्वारा इस वर्ष बीएससी में गत कई वर्षों की तुलना में न्युनतम सीटें निर्धारित किया जाना भी छात्र हित में उचित प्रतीत नहीं होता है। विश्वविद्यालय छात्रों के हित में कार्य करने के लिए बनाया गया है और हम सभी का कर्तव्य होता है कि हम छात्र हितों को देखते हुए ही निर्णय लें।

मंहगाई और कोरोना जैसी महामारी का सामना करती हुई पर्वतीय आंचल की गरीब जनता पर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम प्रारम्भ कर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डालना उचित प्रतीत नहीं होता है, जो पाठ्यक्रम नियमित मोड में परिसर में पूर्व से संचालित हो रहे हैं, उन्ही पाठ्यक्रमों को साथ-साथ स्ववित्त पोषित मोड में चलाया जाना उत्तराखंड शासन के शासनादेशों के भी अनुरूप नहीं है। वह इस नव सृजित विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति प्रो. नरेन्द्र सिंह भण्डारी से विनम्र निवेदन करते हैं कि वो इस विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए समाज एवं छात्रों के हित में निर्णय लेने का कष्ट करें, ताकि नव श्रृजित विश्वविद्यालय अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सके एवं उच्च शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक लगाने में सफल हो सके।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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