CNE Special: सब्जियों की शान ‘आलू’ उत्पादन में बोरारौघाटी है नामी, आलू खुदाई शुरू, अच्छी फसल से किसानों के चेहरे खिले, चहुंओर प्रसिद्ध है बोरारौघाटी का ‘potato’
सोमेश्वर क्षेत्र में खुदाई से लगने लगे आलू के ढेर।
दिनकर प्रकाश जोशी, सोमेश्वर
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सोमेश्वर क्षेत्र (बोरारौघाटी) में आलू खुदाई में व्यस्त महिलाएं।
बोरारौघाटी की मनोहारी कृषि क्षेत्र में इन दिनों सब्जियों में प्रमुख ‘आलू’ के ढेर लगने शुरू हो गए। क्षेत्र में किसान आलू खुदाई में जोरशोर से जुट गए हैं। इस बार आलू की पैदावार अच्छी हुई है। हालांकि कई जगह सुअरों ने आलू की खेती पर हमला कर जरूर क्षति पहुंचाई। यूं तो बोरारौघाटी क्षेत्र में प्राचीन समय से आलू की खेती होती है और आलू उत्पादन में इस घाटी का काफी योगदान है। यहां के आलू बेहद स्वादिष्ट माना जाता है, जिसके भोजन लजीज हो जाता है। यही वजह है कि यहां के आलू की मांग हर तरफ है। दूर—दूर से लोग सीजन में यहां आलू खरीदने या पहले डिमांड देने आते हैं। फसल बेहतर होने पर आलू की फसल क्षेत्र में तमाम किसानों की अच्छी आमदनी का जरिया है। किसानों का कहना है कि इस बार महंगा बीज लगाया था, ऐसे में पैदावार को लेकर यह आशंका थी कि यदि पैदावार गिरी, तो काफी नुकसान झेलना पड़ेगा, मगर धरती माता की कृपा और किसानों की कठिन मेहनत रंग लाई, तो इस बार पैदावार संतोषजनक हुई है। इस बीच किसान आलू की खुदाई में व्यस्त हैं और पैदावार को लेकर संतोष में हैं।
ताकुला ब्लाक के ज्येष्ठ उप प्रमुख ललित मोहन दोसाद कहते हैं कि बोरारौघाटी का आलू पूरे देश में प्रसिद्ध है। इसके पीछे वजह इसका बेहद स्वादिष्ट होना है। उन्होंने बताया कि इस बार महंगा बीज जरूर लगा था, लेकिन फसल अच्छी होने से काश्तकार मुनाफा कमाएंगे। ऐसी उम्मीद है। उन्होंने कहा है कि क्षेत्र में दशकों से आलू की अच्छी पैदावार होती है, मगर जरूरत के बाद भी आज तक क्षेत्र में कोल्ड स्टोर नहीं बन सका। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कोल्ड स्टोर बने, इसके लिए उनके प्रयास जारी हैं। उन्होंने उद्यान विभाग से भी अनुरोध किया है कि अगली बार समय पर आलू का अच्छा बीज काश्तकारों को उपलब्ध कराया जाए, क्योंकि आलू की फसल नगदी फसल है, जिससे तमाम काश्तकारों का घर चलता है। साथ ही बन्दरों और सुअरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए मनरेगा के तहत चौकीदार नियुक्त करने का भी अनुरोध किया है।