सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
त्वचा हमारे शरीर का सुरक्षा कवच है। त्वचा ही हमारे शरीर के आंतरिक भाग को विविध प्रकार के इंफेक्शन (संक्रमण) से बचाती है। ऐसे में यह सभी को भली—भांति समझ लेना चाहिए कि त्वचा को स्वस्थ रखना बहुत आवश्यक है। स्किन (त्वचा) को भी कई तरह की बीमारियां प्रभावित करती हैं। त्वचा से संबंधित बीमारियों के लक्षण सीमित होते हैं, जिन पर आमतौर पर लोग ध्यान नहीं देते और कई बार लक्षणों को नजरअंदाज करना बाद में बड़ी परेशानी को जन्म देता है। त्वचा संबंधी मामले पर सीएनई ने स्वास्थ्य चर्चा के तहत कृष्णा हास्पिटल हल्द्वानी में कार्यरत स्किन स्पेशलिस्ट एवं कोस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अक्षत टम्टा (एमबीबीएस, एमडी—डीवीएल) से बातचीत की। जिसमें डॉ. टम्टा ने महत्वपूर्ण जानकारी जनहित में दी है। प्रस्तुत हैं त्वचा विशेषज्ञ डा. अक्षत टम्टा से बातचीत के अंश—
सीएनई— त्वचा की बीमारियों के सीमित लक्षण क्या हैं?
विशेषज्ञ— त्वचा का लाल, सफेद या काला हो जाना, त्वचा का मोटा होना, त्वचा में पपड़ी बनना, त्वचा में दाने होना या खुजली होना आदि सीमित लक्षण हैं। इनके आधार पर ही बीमारियों का डायग्नोसिस होता है। ऐसे लक्षण होने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए और इलाज कराना आवश्यक है।
सीएनई— आमतौर पर देखा जाता है कि लोग त्वचा संबंधी कोई तकलीफ होने पर स्वयं ही घरेलू उपचार करने लगते हैं, यह कहां तक उचित है?
विशेषज्ञ— त्वचा संबंधित बीमारियों के लिए लोग अभी पूरी तरह जागरूक नहीं हैं। इसीलिए अपना इलाज स्वयं करने लगते हैं। आम जनता त्वचा की हर बीमारी को एलर्जी मान लेती है और स्वयं ही घरेलू उपचार लेने लगते हैं। जैसे त्वचा पर टूथपेस्ट लगाना, चूना लगाना, लहसुन रगड़ लेना, तेल मालिश करना, एलोवेरा लगा लेना, हल्दी लगा लेना इत्यादि। यह सब करने के बाद जब बीमारी ठीक नहीं होती, तो बाजार से तरह—तरह की क्रीम खरीदकर लगाते हैं। वह भी बिना यह जाने कि क्रीम क्या है और उससे क्या हानि हो सकती है। इसके बाद भी बीमारी ठीक नहीं होती, तो स्थानीय फार्मेसी से स्टेरॉयड कॉन्बिनेशन क्रीम लगाते हैं। तब तक बीमारी काफी बढ़ जाती है, फिर डाक्टर के पास पहुंचते हैं।
सीएनई— क्या स्टेरॉयड कांबिनेशन क्रीम लाभदायी होती है?
विशेषज्ञ— बिना बीमारी को जाने स्टेरॉयड कांबिनेशन क्रीम के लगाने से बीमारी कुछ दिनों के लिए छुप जाती है, परंतु जैसे ही क्रीम लगाना बंद करते हैं, तो कुछ ही दिनों में बीमारी फिर प्रकट हो जाती है। दुबारा में बीमारी और विकराल रूप में सामने आती है। इसके बाद जब मरीज चर्म रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचता है, तो बीमारी की पहचान करना कठिन हो जाता है और इलाज लंबा हो जाता है।
सीएनई— बीमारी का विकराल रूप से क्या मतलब है?
विशेषज्ञ— इसका सबसे अच्छा उदाहरण फफूद संक्रमण या फंगल इन्फेक्शन है। जिसे टीनिया इनफेक्शन भी कहते हैं। टीनिया इंफेक्शन में शरीर पर लाल रंग के गोलाकार दाद बन जाते हैं और उस पर अत्यधिक खुजली होती है। इससे मरीज काफी परेशान रहता है।
सीएनई— पहाड़ में त्वचा रोगों के प्रसार की क्या स्थिति देखी गई है?
विशेषज्ञ— पहाड़ में त्वचा रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ सालों से फंगल इन्फेक्शन के मरीजों में तादाद तेजी से बढ़ी है। चर्म रोगों में प्रतिदिन देखे जाने वाले मरीजों में 25 से 30 प्रतिशत मरीज फंगल इंफेक्शन से पीड़ित पाए जाते हैं। एक से दूसरे को फैलने, एक ही परिवार में कई सदस्यों को फंगल इंफेक्शन होना, चेहरे पर फंगल इन्फेक्शन होना, इलाज के बाद भी बीमारी ठीक नहीं होने से प्रतीत होता है कि फंगल इन्फेक्शन अब एक सामुदायिक बोझ बन रही है।
सीएनई— आम जनता के लिए क्या सुझाव है?
विशेषज्ञ— त्वचा के प्रति सावधान रहते हुए त्वचा को तंदरूस्त रखना चाहिए। खासकर फंगल इन्फेक्शन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और स्टेरॉइड क्रीम लगाकर स्वयं इलाज करने से बचना चाहिए। त्वचा संबंधी कोई भी परेशानी होने पर जल्द चर्म रोग विशेषज्ञ से इलाज लेना चाहिए। स्किन की बीमारियों का सही इलाज और उसे दूसरों को फैलने से रोकने के लिए जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह लें और उपचार कराएं।
स्वास्थ्य चर्चा: शरीर के सुरक्षा कवच ‘त्वचा’ की अनदेखी ना करें, सीएनई की त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. अक्षत टम्टा से खास बातचीत, पढ़िये क्या कहते हैं डॉ. अक्षत !
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