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अल्मोड़ा न्यूजः दृष्टिबाधितों के जीवन में क्रांतिकारी बदलावा लाए लुई ब्रेल, जन्मदिवस पर किए गए याद, दृष्टिबाधितों के समस्याओं के निदान पर जोर

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
लुई ब्रेल का आविष्कार दृष्टिबाधितों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया। दृष्टिबाधितों के लिए उनके प्रयासों को कभी नहीं भुलाया जा सकता। यह बात आज यहां लुई ब्रेल के जन्मदिन कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही। राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ कार्यालय में जन्मदिवस कार्यक्रम में लुई ब्रेल को याद करते हुए दृष्टिबाधितों की समस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ की अल्मोड़ा शाखा ने यहां संघ कार्यालय में लुई ब्रेल का जन्मदिवस कार्यक्रम आयोजित किया। ब्रेल दिवस के रूप में यह दिवस कोरोना महामारी के मद्देनजर औपचारिक रूप से मनाया गया। इस मौके पर आयोजित गोष्ठी से पूर्व लुई ब्रेल के साथ ही पत्रकार स्व. पीसी जोशी व राजकीय संग्रहालय की पूर्व प्रभारी मंजू तिवारी के चित्रों पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें नमन किया गया। गोष्ठी में जयंती पर लुई ब्रेल को याद करते हुए बताया गया कि उनका जन्म 1809 में हुवा और तीन वर्ष की उम्र में उनकी आंखे खराब हो गई थीं। लुई ने सामान्य बच्चों की तरह पढ़ाई शुरू की, किन्तु दृष्टिबाधित होने से उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में उन्होंने दृष्टिबाधितों के लिए सोचा और सैनिकों के लिये रात में काम करने वाली बारह बिन्दुओं की लिपि को उन्होंने 6 बिन्दुओं की लिपि मे परिष्कृत किया। इसी से दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि का आविष्कार हुआ। उनकी यह देन दृष्टि बाधितों की पढ़ाई-लिखाई में क्रान्तिकारी बदलाव लाने में सफल रही। आज इसी लिपि से पढ़कर दृष्टिबाधित उच्च पदों तक आसीन हो रहे हैं।
गोष्ठी में संघ के महासचिव डीके जोशी ने कहा कि लुई ब्रेल ने विकलांगों के जीवन में क्रान्ति लाने का काम किया है। उन्होंने लुई ब्रेल को श्रद्धान्जली देते हुए कहा कि आज मन्जू तिवारी की पुण्य तिथि भी है। उन्होंने स्व. मन्जू तिवारी के साथ समाज हित में कार्य करने वाली महिला स्व. मधु खाती को भी याद किया। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने लुई ब्रेल को श्रद्धान्जली देते हुवे कहा कि संघर्षो के बल पर दिव्यांगों को प्राप्त अधिकारों की सुरक्षा करना बेहद जरूरी है। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डा. जेसी दुर्गापाल ने कहा कि नेत्रों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों में एक अन्तर्मन की शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि हमें दिव्यांगों के प्रति सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। अन्य वक्ताओं ने दिव्यांगो की समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिव्यांगों को जीवनयापन के लिए पर्याप्त पेंशन मिलनी चाहिये और दिव्यांगों की समस्याओं के त्वरित निदान पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन चन्द्रमणि भट्ट ने किया। गोष्ठी को हेम खुल्वे, दयाकृष्ण काण्डपाल, पीएस बोरा, रश्मि डसीला, एमसी काण्डपाल, जगदीश चन्द्र ममगई आदि ने सम्बोधित किया।

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