इस साल मई माह में अल्मोड़ा के मौसम पर कवीन्द्र पंत की कविता —
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सुबह—सुबह चादर दुग्ध धवल कोहरे ने फिर से तानी है लौट आई गर्मी में फिर से सर्द हवाओं की वही रवानी है पुनः—पुनः लौट—लौट यह सर्दी की कैसी मनमानी है गर्मी को चेताने की फिर क्यों कर सर्दी ने ठानी है।
दूर—दूर तक जहां कहीं भी जाती है दृष्टि मेरी फैली हर ओर छोर तक श्वेत धूम्र की सी चादर घनेरी बीच कुहास छन आती रवि की एक पल किरण सुनहरी देती आभास नव जीवन का फिर एक नई दुपहरी।
होता मध्य धूम्र दृष्टिगोचर नगर का एक कोना नील अंबर तले रचा यह कैसा अद्भुत दृश्य सलोना यह नदी दुग्ध की या बादल के आंगन का कोना अद्भुत सुबह अल्मोड़ा की, अद्भुत नगर का सौंदर्य सलोना।
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।