अंकिता भंडारी हत्याकांड: ‘VIP एंगल’ पर उठे सवाल, राज्यपाल की नियुक्ति पर कांग्रेस ने मांगा जवाब

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अंकिता भंडारी हत्याकांड: ‘VIP एंगल’ पर उठे सवाल, राज्यपाल की नियुक्ति पर कांग्रेस ने मांगा जवाब
अंकिता भंडारी हत्याकांड: ‘VIP एंगल’ पर उठे सवाल, राज्यपाल की नियुक्ति पर कांग्रेस ने मांगा जवाब

जिलाध्यक्ष भोज बोले—‘अंकिता को न्याय कब, कथित VIP का सच कब आएगा सामने?’

केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन से मांगा स्पष्ट जवाब, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की उठाई मांग

CNE REPORTER, अल्मोड़ा। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में आ गई है। अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित VIP एंगल और इस प्रकरण को लेकर सवालों के घेरे में बताए जा रहे दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक बेटी की हत्या का मामला नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वाभिमान, मातृशक्ति की गरिमा और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा संवेदनशील प्रश्न है।


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कांग्रेस ने मांग की है कि अंकिता हत्याकांड के कथित VIP एंगल की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए। साथ ही, इस प्रकरण को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन की ओर से स्थिति स्पष्ट की जाए। पार्टी ने दो टूक कहा कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका जांच में सामने आती है तो उसके राजनीतिक रसूख, पद और पहुंच की परवाह किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

राज्यपाल की नियुक्ति पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र भोज ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता आज भी अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में हत्याकांड से जुड़े कथित VIP एंगल को लेकर उठते रहे सवालों के बीच दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति ने प्रदेश में नई बहस को जन्म दिया है।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल जैसा संवैधानिक पद राजनीतिक विवादों से ऊपर होना चाहिए। इस पद की गरिमा और जनता के विश्वास को बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसलिए अंकिता प्रकरण से जुड़े सवालों का समाधान पारदर्शी जांच और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए, ताकि किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे।

हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता का निर्धारण आरोपों अथवा राजनीतिक सवालों के आधार पर नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होना चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि मामले में उठ रहे सवालों को गंभीरता से लिया जाए और जांच के निष्कर्षों को तथ्यों के आधार पर सामने लाया जाए।

‘अगर VIP एंगल नहीं, तो सवालों के जवाब क्यों नहीं?’

भूपेंद्र भोज ने मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार और जांच एजेंसियां किसी VIP की संलिप्तता से इनकार करती हैं, तो इस प्रकरण से जुड़े तमाम सवालों का संतोषजनक और सार्वजनिक जवाब दिया जाना चाहिए।

पार्टी का कहना है कि किसी संवेदनशील आपराधिक मामले में केवल संदेहों को खारिज कर देना पर्याप्त नहीं है। जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब जांच के तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सामने आना चाहिए। इससे न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होगी, बल्कि न्याय व्यवस्था के प्रति आम लोगों का भरोसा भी कायम रहेगा।

कांग्रेस ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की पीड़ा को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय उनकी मांगों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए। एक परिवार अपनी बेटी को खो चुका है और अब न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। ऐसे में उसकी आवाज को अनसुना करना किसी भी संवेदनशील समाज और जिम्मेदार व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

CBI जांच पर निगाहें, पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग

जिलाध्यक्ष भूपेंद्र भोज ने अपने बयान में जनवरी 2026 में उत्तराखंड सरकार की ओर से VIP एंगल समेत पूरे मामले की CBI जांच के लिए केंद्र सरकार को औपचारिक अनुरोध भेजे जाने का भी उल्लेख किया। पार्टी ने मांग की कि जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया जाए और प्रकरण से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सवालों की निष्पक्षता से पड़ताल हो।

कांग्रेस का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि तथ्यों को सामने लाना और कानून के अनुसार जवाबदेही सुनिश्चित करना होना चाहिए। यदि जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी दबाव या पक्षपात के विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।

पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन किसी संवेदनशील मामले में उठ रहे गंभीर सवालों की निष्पक्ष जांच कराना और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाए रखना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है।

अंकिता के माता-पिता की लड़ाई को मिले न्याय

कांग्रेस ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता का संघर्ष केवल अपने परिवार के लिए न्याय पाने तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला उत्तराखंड की उन तमाम बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय की उम्मीद से भी जुड़ गया है, जो चाहती हैं कि किसी भी अपराध में दोषियों को उनके प्रभाव या पहचान के कारण संरक्षण न मिले।

पार्टी के अनुसार, न्याय में देरी और अनुत्तरित सवाल पीड़ित परिवार की पीड़ा को और बढ़ाते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित संस्थाएं जिम्मेदारी के साथ काम करें, जांच की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कायम रखें और कानूनी प्रक्रिया के तहत सच्चाई सामने लाने के प्रयासों को गति दें।

‘यह किसी दल की नहीं, उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई’

कांग्रेस ने दोहराया कि अंकिता भंडारी प्रकरण को किसी राजनीतिक दल के हितों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने का सवाल है।

पार्टी ने कहा कि कांग्रेस अंकिता के परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और जब तक इस प्रकरण से जुड़े सवालों का निष्पक्ष जांच के माध्यम से समाधान नहीं होता, तब तक लोकतांत्रिक और गांधीवादी तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी।

अब सवाल सीधे हैं—अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय कब मिलेगा? कथित VIP एंगल से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब कब सामने आएगा? और जांच के जरिए उन तमाम शंकाओं का समाधान कब होगा, जो लंबे समय से प्रदेश की जनता के मन में बनी हुई हैं? कांग्रेस ने केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से इन सवालों पर स्पष्टता लाने की मांग करते हुए कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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