16 जुलाई तक 70 हजार पौधों के रोपण का लक्ष्य
सीएनई रिपोर्टर, पिथौरागढ़। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ ने पिथौरागढ़ जिले के दूरस्थ बनानी गांव परिक्षेत्र में विशेष वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। ग्राम पंचायत, स्थानीय ग्रामीणों और स्कूली विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से आयोजित इस अभियान के पहले चरण में 10 हजार पौधों का रोपण किया गया।

यह अभियान हरित आवरण में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा जनसहभागिता के माध्यम से प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। अभियान में बटालियन के अधिकारियों एवं सैनिकों के साथ ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवकों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपते हुए पर्यावरण संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण उपलब्ध कराने का संकल्प लिया।
बटालियन के सहायक कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल वी.एस. दानू ने बताया कि हरेला सप्ताह के दौरान बटालियन ने 70 हजार पौधों के रोपण एवं बीजारोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह विशेष अभियान आगामी 16 जुलाई 2026 को हरेला पर्व के अवसर पर अपने भव्य समापन तक निरंतर जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि समापन समारोह के अवसर पर लेलू ग्राम, पिथौरागढ़ में एक विशाल वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राज्य वन विभाग, जिला प्रशासन, भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बल (सीएपीएफ), ग्राम पंचायतों, स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, स्कूली छात्र-छात्राओं तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। आयोजन का उद्देश्य निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए जनआंदोलन जैसी व्यापक भागीदारी विकसित करना है। इस अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित सैन्य एवं नागरिक गणमान्य व्यक्तियों के भी शामिल होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ पिछले लगभग तीन दशकों से कुमाऊँ क्षेत्र में वनीकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जनसहभागिता आधारित ऐसे अभियानों के माध्यम से बटालियन “हरित उत्तराखण्ड–समृद्ध उत्तराखण्ड” के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हरेला सप्ताह के दौरान संचालित यह अभियान भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व और सामाजिक सहभागिता का प्रभावी उदाहरण बनकर उभर रहा है।



