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मिशन टीबी फ्री इंडिया: अल्मोड़ा के महतगांव से उठी टीबी के खिलाफ हुंकार

✍️ ‘जन-जन को जगाना है-टीबी को भगाना है’ नारे संग स्वास्थ्य शिविर
✍️ मुफ्त में टीबी स्क्रीनिंग के साथ एक्स-रे, शुगर और ब्लड प्रेशर जांच

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: निकटवर्ती ब्लाक हवालबाग के महतगांव में सौ दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आज क्षय रोग विभाग की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर लगा। ‘जन-जन को जगाना है-टीबी को भगाना है’ नारे के साथ अनेक लोगों की जांचें की गईं और टीबी मुक्त गांव बनाने के लिए ग्रामीणों में जागरूकता की अलख जगाई गई।

वरिष्ठ जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. प्रांशु डेनियल के निर्देशन में पूरे जिले में स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्राम, ब्लॉक स्तर, ग्राम स्तर पर उतर कर राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम का लक्ष्य हासिल करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जिसके तहत जगह-जगह कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज शुक्रवार को निकटवर्ती हवालबाग ब्लाक के महतगांव में शिविर लगाया गया। जिसमें 54 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग करने के साथ ही हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से 51 एक्स-रे किए गए और 35 लोगों की शुगर जांच की गई। कईयों को ब्लड प्रेशर चेक किया गया। यह सभी जांचें मुफ्त की गई। इससे पहले ग्राम प्रधान प्रवीण सिंह मेहता के नेतृत्व में ग्रामीण सुबह 10 बजे हरज्यू मंदिर के प्रांगड़ में एकत्र हुए। जहां ग्राम प्रधान प्रवीण सिंह मेहता ने भी ग्रामीणों को रोग के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि टीबी से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है। यदि किसी को बीमारी से संबंधित लक्षण प्रकट हों, तो उन्हें अवश्य बलगम की जांच कराकर शंका का समाधान कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीबी रोग के लिए इलाज के लिए सभी जांच व उपचार मुफ्त हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेंद्र सिंह मेहता ने कहा कि सभी के प्रयास से क्षय टीबी रोग पर पूरी तरह नियंत्रण लगाया जा सकता है।

हवालबाग के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन तिवारी ने लोगों से प्रेरित किया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्राम स्तर पर कैंप लगा रही हैं। इन कैंपों का ग्रामीणों को लाभ उठाना चाहिए, तभी हम अपने गांव व घरों को टीबी मुक्त बना सकेंगे। वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक आनंद सिंह मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि टीबी रोग माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होने वाली संक्रामक बीमारी है।यह शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है, लेकिन फेफड़े प्रभावित होने के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाली बारीक बूंदों से फेफड़े की टीबी फैलती है। इसलिए टीबी का समय पर इलाज होना जरूरी है। केवल छह माह लगातार नियम से दवा लेकर टीबी रोग से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने जानकारी दी कि कल यानी 20 जून को करालबूंगा गांव में निःशुल्क कैंप लगेगा। इस कार्यक्रम में सीएचओ प्रियंका, एएनएम गीता तिवारी, लैब टेक्निशियन भुवन चंद्र तिवारी, गोपाल सिंह, पान सिंह, नारायण सिंह, मोहन सिंह, आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री रेखा मेहता, आशा वर्कर सना मेहता आदि भी मौजूद रहे।

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