तेज हवा और आंधी के बाद आया था फॉल्ट
CNE REPORTER, देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से इस वक्त की बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है। चकराता रोड स्थित ओम सिटी में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन की मरम्मत करते समय एक भयानक हादसा हो गया। इस हादसे में लाइन ठीक कर रहे 5 कर्मचारी करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए, जिनमें से एक कर्मचारी की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। बाकी 4 कर्मचारियों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी निजी अस्पताल में आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को आई तेज आंधी और हवा के कारण घंटाघर से लेकर बल्लूपुर चौक और चकराता रोड स्थित पथरीबाग की ओम सिटी सोसाइटी की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी। सोसाइटी की बिजली लाइन में आए इसी फॉल्ट को ठीक करने और व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत काम शुरू किया गया था। यह काम एक निजी कंपनी के अधीन ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा था।
शटडाउन लिए बिना खंभा लगाने की जानलेवा लापरवाही
हादसे की मुख्य वजह एक बेहद गंभीर लापरवाही को माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के रहने वाले मजदूर वहां नया बिजली का खंभा (पोल) खड़ा कर रहे थे। इसी दौरान लोहे का भारी-भरकम खंभा पास से ही गुजर रही 11,000 वोल्ट (11 KV) की हाईटेंशन लाइन से छू गया। खंभे के हाईटेंशन लाइन से टच होते ही पूरे पोल में बिजली का जोरदार करंट दौड़ गया। उस वक्त खंभे को पकड़कर खड़े पांचों कर्मचारी करंट की चपेट में आ गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इतना संवेदनशील काम करने से पहले यूपीसीएल (UPCL) से बिजली का कोई शटडाउन नहीं लिया गया था और न ही विभाग के आला अधिकारियों को इसकी कोई सूचना दी गई थी।
11 हजार वोल्ट का करंट इतना भयानक था कि अमरोहा निवासी उमेश नामक कर्मचारी की मौके पर ही झुलसने और तड़पने से मौत हो गई। वहीं, उनके साथ काम कर रहे अन्य चार साथी—जिनमें पप्पू और जसमान शामिल हैं—गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां वे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस बल मौके पर और अस्पताल पहुंचा। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि अस्पताल प्रशासन के जरिए पुलिस को इस हादसे की सूचना मिली थी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मृतक उमेश के शव का पंचनामा भरा और उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अमरोहा से देहरादून पहुंचे मृतक के बदहवास परिजनों को शव सौंप दिया गया है। पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, ओम सिटी में जिस जगह यह काम चल रहा था, उसके महज 100 मीटर के दायरे में पहले से ही दो बिजली के खंभे लगे हुए हैं। इन दोनों पुराने खंभों के बीच से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन के तार झूल रहे थे। कर्मचारी इसी खतरनाक जोन के ठीक बीचों-बीच नया खंभा खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके कारण नया पोल पुराने तारों से टकरा गया और यह भीषण हादसा हो गया।
हादसे के बाद जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अधिकारी और ठेकेदार
इतने बड़े हादसे और एक मजदूर की मौत के बाद अब बिजली विभाग, आरडीएसएस (RDSS) और निजी कंपनी के अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं और एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं:
- ठेकेदार विवेक कुमार का बयान: ठेकेदार विवेक कुमार ने दावा किया कि RDSS का काम जरूर चल रहा था, लेकिन रविवार को काम करने का कोई शेड्यूल नहीं था। अधिकारियों ने रविवार को शटडाउन देने से साफ मना कर दिया था। ऐसे में कर्मचारियों ने बिना बताए काम क्यों शुरू किया, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
- RDSS के अधिशासी अभियंता अंकित जैन का दावा: दूसरी तरफ, आरडीएसएस के अधिशासी अभियंता अंकित जैन ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि वहाँ उनकी योजना का काम चल रहा था। उन्होंने कहा कि ओम सिटी में चल रहे किसी भी काम की उन्हें कोई सूचना नहीं थी और न ही कोई शटडाउन मांगा गया था। उन्होंने कहा कि जो भी काम हो रहा था, वह निजी कंपनी का था और कर्मचारी ठेकेदार के अधीन थे। विभाग का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
बड़ा सवाल: एक गरीब मजदूर की जान चली गई और चार अस्पताल में हैं, लेकिन सवाल वही है कि बिना शटडाउन और बिना सुरक्षा उपकरणों के इतनी हाई-वोल्टेज लाइन के पास काम करने की इजाजत किसने दी? पुलिस फिलहाल ठेकेदार और बिजली विभाग के दावों की पड़ताल कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कह रही है।


