HomeUttarakhandBageshwarबागेश्वर: तीन संतानें होने पर जिला पंचायत सदस्य अयोग्य घोषित

बागेश्वर: तीन संतानें होने पर जिला पंचायत सदस्य अयोग्य घोषित

पंचायतीराज नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई

विहित प्राधिकारी का अंतिम निर्णय

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : उत्तराखण्ड में पंचायतीराज नियमों के उल्लंघन के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जनपद के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र-04 (असों) से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य कुन्दन राम को तीन जीवित जैविक संतानें होने के कारण पद हेतु अयोग्य घोषित कर दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी आर.सी. तिवारी ने शनिवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर निर्वाचन को शून्य कर दिया है।

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जिला पंचायत सदस्य कुन्दन राम
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यह पूरा मामला पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष भगवत डसीला द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद सुर्खियों में आया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुन्दन राम ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ते समय अपनी संतानों की वास्तविक संख्या के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए थे। आरोप था कि उनकी तीन जीवित जैविक संतानें हैं, जो कि निर्वाचन के लिए निर्धारित मानदंडों के विरुद्ध है। मामले की गंभीरता को देखते हुए निदेशक पंचायतीराज, उत्तराखण्ड के निर्देश पर सीडीओ बागेश्वर द्वारा विस्तृत जांच के आदेश दिए गए थे।

सच्चाई का पता लगाने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ने एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति में परियोजना निदेशक (डीआरडीए), जिला पंचायतराज अधिकारी (DPRO) और खण्ड विकास अधिकारी, बागेश्वर को शामिल किया गया। समिति ने मामले की तह तक जाने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के डेटा का मिलान किया।

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जांच समिति ने अपनी पड़ताल में महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड्स, पोषण ट्रैकर एप, टीकाकरण पंजिकाओं और टेक होम राशन (टीएचआर) के अभिलेखों का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य 06 सितम्बर 2025 को पंजीकृत एक गोदनामा बना, जिसमें स्वयं कुन्दन राम ने स्वीकार किया था कि उनकी तीन जीवित जैविक संतानें हैं। स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों में भी तीसरी संतान के जन्म और पोषण से संबंधित विवरण दर्ज पाए गए, जिससे शिकायत की पुष्टि हुई।

जांच समिति की रिपोर्ट और कुन्दन राम द्वारा स्वयं लिखित रूप में तीसरी संतान की पुष्टि किए जाने के बाद, मुख्य विकास अधिकारी ने कानून सम्मत कार्रवाई की। उत्तराखण्ड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की धारा-90(1)(द) के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि दो से अधिक जीवित जैविक संतान वाला व्यक्ति जिला पंचायत सदस्य के पद पर बने रहने के लिए पात्र नहीं है। इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

निष्पक्ष कार्यवाही और अपील का अधिकार

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्यवाही पूर्णतः पारदर्शी और विधिसम्मत रही है। निर्णय सुनाने से पूर्व संबंधित सदस्य को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। हालांकि, लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि संबंधित पक्ष इस निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो वह आदेश प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर मण्डलायुक्त, कुमाऊँ मण्डल के समक्ष अपनी अपील प्रस्तुत कर सकता है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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