सोनप्रयाग में सुबह-सुबह बरसी मौत, यात्रियों में मची भगदड़
चारधाम यात्रा एक घंटे के लिए ठप, JCB से हटाया गया मलबा
तीन दिन पहले भी हुआ था भूस्खलन
CNE DESK/उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से एक बेहद दुखद और डराने वाली खबर सामने आ रही है। बाबा केदारनाथ धाम के मुख्य पैदल मार्ग पर शुक्रवार सुबह एक भीषण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हो गया। यह हादसा सोनप्रयाग बाजार क्षेत्र में बैरियर के पास सुबह करीब 8 बजे घटित हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक पहाड़ से बड़े-बड़े बोल्डर और भारी पत्थर ताश के पत्तों की तरह नीचे गिरने लगे। इस आकस्मिक हादसे की चपेट में आने से एक स्थानीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है। पत्थरों की बरसात होते देख घाटी में चीख-पुकार मच गई और यात्रियों ने भागकर बमुश्किल अपनी जान बचाई।

पहाड़ दरकने की इस भयानक घटना के तुरंत बाद केदारनाथ हाईवे पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया। सजग यात्रियों ने बिना वक्त गंवाए स्थानीय पुलिस और प्रशासन को मामले की सूचना दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने ऐहतियातन केदारनाथ यात्रा को करीब एक घंटे के लिए पूरी तरह रोक दिया। मार्ग बंद होने से दोनों ओर यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं। इसके बाद पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमों ने मोर्चा संभाला और भारी-भरकम JCB मशीनों की मदद से हाईवे पर गिरे बोल्डरों को हटाकर रास्ता साफ कराया, जिसके बाद यात्रा को दोबारा सुचारू किया जा सका।

मृतक की हुई पहचान, घायल नेपाली नागरिक अस्पताल में भर्ती
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सुबह के समय सोनप्रयाग पहाड़ी से अचानक गिरे पत्थरों की चपेट में दो लोग आ गए थे। इनमें से एक व्यक्ति ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान उमेद सिंह नेगी (48 वर्ष) के रूप में हुई है, जो रुद्रप्रयाग के गुप्तकाशी (बड़ेत) के रहने वाले थे। वहीं, हादसे में घायल दूसरा व्यक्ति नेपाल का मूल निवासी है, जो यहां मजदूरी कर अपनी आजीविका कमा रहा था। घायल की पहचान बम बहादुर (42 वर्ष) के रूप में हुई है, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती: “भागते नहीं तो दफन हो जाते 20 यात्री”
हादसे के वक्त मौके पर मौजूद केदारनाथ जा रहे श्रद्धालुओं ने खौफनाक मंजर बयां करते हुए बताया कि यह हादसा सोनप्रयाग स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर से महज 10 मीटर आगे हुआ। यात्रियों के मुताबिक, जैसे ही ऊपर से पत्थरों के गिरने की आवाज आई, वे सब जान बचाकर पीछे की तरफ भागे। श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर वे समय रहते वहां से नहीं भागते, तो कम से कम 15 से 20 यात्री मलबे के नीचे दब सकते थे। इस भयावह हादसे के बाद से केदारघाटी में सन्नाटा पसरा हुआ है और आगे की चढ़ाई को लेकर यात्रियों के मन में भारी डर बैठ गया है।
हादसे के वक्त मौके पर मौजूद थे 500 से अधिक श्रद्धालु
केदारघाटी व्यापार संघ एवं टैक्सी यूनियन सोनप्रयाग के अध्यक्ष अंकित गैरोला ने बताया कि जिस वक्त यह भूस्खलन हुआ, उस समय घटना स्थल और उसके आसपास 500 से अधिक तीर्थयात्री मौजूद थे। गनीमत रही कि पत्थरों की जद में ज्यादा लोग नहीं आए, अन्यथा यह एक बड़े नरसंहार का रूप ले सकता था। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर लोग डरे हुए हैं और प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन की चेतावनी: दो दिन पहले ही जारी हुआ था अलर्ट
इस दर्दनाक हादसे के बाद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम पूरी तरह मुस्तैद है। अधिकारियों ने पहाड़ी से लगातार गिर रहे पत्थरों और भविष्य के खतरे को देखते हुए प्रभावित इलाके को अस्थायी रूप से खाली करा दिया है। प्रशासन ने सभी तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों से बेहद सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने खुलासा किया कि मौसम के मिजाज और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए दो दिन पहले ही इस पूरे इलाके में अनावश्यक आवाजाही न करने की सख्त चेतावनी (अनलॉफुल मूवमेंट अलर्ट) जारी की गई थी। प्रशासन ने एक बार फिर अपील की है कि यात्री केवल सुरक्षित और तय समय पर ही यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ें।
ज्ञात रहे कि इससे 3 दिन पहले यानी मंगलवार को केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच मुनकटिया क्षेत्र में देर रात भारी भूस्खलन हुआ था। पहाड़ी से लगातार गिरते मलबे और खराब मौसम के कारण मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था, जिससे हजारों ग्रामीणों और यात्री बीच रास्ते में फंस गए थे।


