प्रथम रविवार को जुटता है उत्तराधिकारियों का जत्था
सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी हल्द्वानी के हृदय स्थल नैनीताल रोड स्थित तिकोनिया शहीद पार्क में आज रविवार का दिन राष्ट्रभक्ति के नाम रहा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन की ओर से आयोजित एक विशेष गोष्ठी में भारी संख्या में उत्तराधिकारियों ने शिरकत की। इस दौरान देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले वीर सपूतों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।



गौरतलब है कि संगठन की यह एक अनूठी परंपरा बन चुकी है। प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को संगठन के बैनर तले स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारी इस ऐतिहासिक पार्क में एकत्रित होते हैं। आज के आयोजन में भी परंपरा का निर्वहन करते हुए ठीक सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर सभी सदस्य एकजुट हुए। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत झंडारोहण और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ की गई, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के स्वरों से गुंजायमान हो उठा।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गौरीदत्त पांडे के पुत्र नवीन चंद्र पांडे ने कहा कि यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि उन पुरखों को सम्मान देने का मंच है जिनकी बदौलत आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस नियत समय पर एकत्रित होकर संगठन न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देता है, बल्कि उनकी गौरव गाथा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का संकल्प भी दोहराता है।
सेनानियों का गौरवशाली इतिहास
आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए नवीन चंद्र पांडे ने बताया कि अकेले नैनीताल जनपद का स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान रहा है। जनपद में लगभग साढ़े पांच हजार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं और आज उनके उत्तराधिकारियों की अनुमानित संख्या डेढ़ लाख से अधिक है। यह संख्या दर्शाती है कि क्षेत्र का कितना बड़ा वर्ग सीधे तौर पर गौरवशाली इतिहास से जुड़ा हुआ है।
सरकार की बेरुखी पर जताई चिंता
श्रद्धांजलि के बीच संगठन ने अपनी समस्याओं और हकों की आवाज भी बुलंद की। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के कई परिजन अब वयोवृद्ध हो चुके हैं। इनमें से कई लोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। वक्ताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दुर्भाग्यवश सरकार और शासन की दृष्टि इन परिवारों की ओर नहीं है।
शासन तक आवाज पहुँचाने का लक्ष्य
संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन मासिक गोष्ठियों का एक मुख्य उद्देश्य शासन-प्रशासन तक अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से पहुँचाना भी है। उन्होंने कहा कि जिन सेनानियों ने देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया, उनके परिजनों की सुध लेना सरकार का नैतिक कर्तव्य है। संगठन अपनी एकजुटता के माध्यम से सरकार को उनकी जिम्मेदारियां याद दिलाता रहेगा।


