खत्याड़ी में धार्मिक अनुष्ठान, गूंजे जयकारे
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा : अल्मोड़ा के निकटवर्ती ग्राम पंचायत खत्याड़ी में धार्मिक उल्लास और अटूट आस्था का संगम देखने को मिला। अवसर था मां मलवटी देवी माता की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का, जिसके उपलक्ष्य में क्षेत्र में एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस दौरान पूरा वातावरण देवी के जयकारों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि से भक्तिमय हो उठा।


कलश यात्रा का मुख्य आकर्षण क्षेत्रीय महिलाओं की भागीदारी रही। बड़ी संख्या में महिलाएं कुमाऊँनी पारंपरिक वेश-भूषा और पिछौड़ा पहनकर सज-धज कर इस यात्रा में शामिल हुईं। सिर पर कलश धारण किए हुए महिलाएं भक्ति भाव से ओत-प्रोत नजर आईं। यात्रा के दौरान लगातार हो रही मां के जयकारों की गूंज ने क्षेत्र के वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
यह धार्मिक यात्रा मल्ली खत्याड़ी से अत्यंत हर्षोल्लास के साथ प्रारंभ हुई। इसके बाद यात्रा रामलीला मैदान तिनारा, लोअर मालरोड और न्यू इंद्रा कॉलोनी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से होते हुए सिमकनी मैदान पहुंची। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया और मां का आशीर्वाद लिया।
सिमकनी मैदान पहुंचने पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलशों में पवित्र जल भरा गया। इसके पश्चात यात्रा पुनः मंदिर परिसर पहुंची। मंदिर में मुख्य पुरोहित पंडित विजय जोशी और उनके सहयोगी आचार्यों की देखरेख में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। विधि-विधान और शास्त्रोक्त रीति से मां मलवटी माता, प्रथम पूज्य भगवान गणेश, न्याय के देवता गोल्ज्यू महाराज, नरसिंह देवता और कलूवा देव की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख हवालबाग आनंद कनवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के इस पुनीत कार्य के संपन्न होने के उपलक्ष्य में आज मंदिर परिसर में एक भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुंचकर दर्शन करें और माता का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य के भागी बनें।
इस पावन अवसर पर प्रधान कमला कनवाल, जिला पंचायत सदस्य ममता कनवाल, बसंत सिंह, चंदन सिंह, पूरन सिंह, अमित कनवाल, राजेंद्र सिंह, राम सिंह, सुंदर सिंह, दीवान सिंह कनवाल, गोविंद सिंह और देव सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। साथ ही आनंदी देवी, कमला देवी, जीवंती देवी, उमा देवी और देवकी देवी समेत भारी संख्या में मातृशक्ति ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।


