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आपदा पीड़ितों की अनदेखी पर भड़के रावत, सरकार की नैतिकता पर उठाए सवाल

जिला मुख्यालय में पत्रकार वार्ता

कनलगड़ घाटी का किया निरीक्षण; कहा- केंद्र के 1400 करोड़ खर्च नहीं कर पा रही सरकार

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और पीड़ितों को राहत देने के प्रति रत्ती भर भी गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा राहत के लिए जो मानक कांग्रेस की सरकार बनाकर गई थी, वर्तमान सरकार उन्हें भी लागू नहीं कर पा रही है। आलम यह है कि केंद्र सरकार से आपदा मद में मिले 1400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि का भी राज्य सरकार अब तक उपयोग नहीं कर पाई है।

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अपने बागेश्वर दौरे के दौरान हरीश रावत ने कनलगड़ घाटी के आपदाग्रस्त गांव पौसारी और बैसानी का स्थलीय निरीक्षण किया। वहां उन्होंने आपदा प्रभावितों से मुलाकात कर उनके दुख-दर्द को सुना और पुनर्निर्माण कार्यों की जमीनी जानकारी ली। इसके बाद जिला मुख्यालय में आयोजित एक विस्तृत पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों और वहां की जनता को पूरी तरह उनके हाल पर छोड़ दिया है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जिले के प्रशासनिक अधिकारी अपना दायित्व बखूबी निभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें जो राजनीतिक सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए था, वह बिल्कुल नहीं मिल पा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि आपदा के इतने समय बाद भी पौसारी क्षेत्र में एक स्कूल तक का रास्ता सरकार नहीं बना पाई है। क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को भारी जानलेवा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, क्षेत्र की पेयजल योजनाएं ध्वस्त पड़ी हैं और उन्हें केवल प्लास्टिक के पाइपों के सहारे अस्थायी रूप से छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण के तमाम कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।

आर्थिक सहायता के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए हरीश रावत ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के निर्माण के लिए 5 लाख रुपये आपदा मद से और 2 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से देने का कड़ा प्राविधान किया था। लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मकानों के पुनर्निर्माण से मुख्यमंत्री राहत कोष पूरी तरह गायब है। उन्होंने चेतावनी दी कि पौसारी के घनश्याम बैंड में 5-6 परिवार आज भी भारी खतरे की जद में हैं और लगातार पुनर्वास की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर उन्हें मौत के मुहाने पर धकेल रही है।

रावत ने एक अत्यंत भावुक मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आपदा के दौरान लापता हुए एक बच्चे का शव आज तक बरामद नहीं हो पाया है। सरकार इस संवेदनशील मामले पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है, जिससे पीड़ित परिजन अत्यंत दुखी और आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आपदा के तुरंत बाद क्षेत्र में जरूर गए थे, लेकिन उसके बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए जो जरूरी राजनीतिक दबाव तंत्र पर बनना चाहिए था, वह नहीं बन पाया। यही कारण है कि आज भी आपदा प्रभावित परिवार डरे और सहमे हुए हैं।

पत्रकार वार्ता में उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी सरकार पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए विपक्ष पर आरोप लगा रही है, जबकि पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बावजूद यह उनकी नैतिक हार है। रावत ने कहा कि जब 2023 में महिला आरक्षण बिल ध्वनिमत से पारित हो चुका था, तो यदि सरकार वास्तव में महिलाओं की हितैषी होती, तो उसे तत्काल लागू करती।

इसके अलावा उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर प्रजातांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिला योजना जैसी महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायत सदस्यों को न बुलाना लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने कड़ा एतराज जताया कि पंचायतों के गठन को 9 महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक डीपीसी (जिला योजना समिति) का गठन नहीं किया गया है, जो पंचायती राज एक्ट का खुला उल्लंघन है।

इस पत्रकार वार्ता और भ्रमण के दौरान पूर्व दर्जा मंत्री गोपाल दत्त भट्ट, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन भट्ट, राजेंद्र टँगड़िया, गोपा धपोला, भगत डसीला, केवल पांडेय, नरेंद्र कुमार, मनोज साह और सुनील भंडारी सहित दर्जनों कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित थे।

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