विधायक मनोज तिवारी की चेतावनी— ‘सुधारें व्यवस्था वरना होगा जनांदोलन’
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा : पर्वतीय जनपदों की लाइफलाइन कही जाने वाली स्वास्थ्य सेवाएं इन दिनों खुद ‘इलाज’ की मोहताज हैं। अल्मोड़ा समेत पूरे पर्वतीय क्षेत्र में बदहाल चिकित्सा व्यवस्था, दम तोड़ती 108 आपातकालीन सेवा और विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव को लेकर क्षेत्रीय विधायक मनोज तिवारी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार न हुआ तो वे जनता के साथ सड़कों पर उतरकर व्यापक जनांदोलन करेंगे।


108 सेवा की बदहाली पर गहरा रोष
विधायक मनोज तिवारी ने आपातकालीन सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली ‘108 एंबुलेंस’ की जर्जर स्थिति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
“जिस सेवा पर आम आदमी की जिंदगी टिकी है, वह आज खुद लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है। कहीं एंबुलेंस के टायर फटे हैं तो कहीं ईंधन की कमी के कारण वाहन खड़े हैं। समय पर एंबुलेंस न मिलने से मरीज दम तोड़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर प्रशासन की विफलता है।”
मेडिकल कॉलेज या सिर्फ ‘रेफरल सेंटर’?
विधायक ने अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की दुर्दशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों की लागत से बना यह संस्थान आज सफेद हाथी साबित हो रहा है। जिले में नेफ्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन जैसे विशेषज्ञों का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। गंभीर स्थिति में मरीजों को हल्द्वानी या बड़े शहरों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सरकार की उदासीनता और ‘आश्वासन की राजनीति’
मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने विधानसभा सत्र से लेकर शासन स्तर तक (मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और सचिव) दर्जनों बार पत्राचार और व्यक्तिगत मुलाकात की, लेकिन जमीनी स्तर पर परिणाम शून्य रहे। उन्होंने कहा:
- स्टाफ की कमी: अस्पतालों में केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि टेक्निकल स्टाफ का भी भारी टोटा है।
- उपेक्षा: 2017 के बाद से वर्तमान सरकार ने मेडिकल कॉलेज के विकास की ओर से आंखें मूंद ली हैं।
- विरासत बनाम वर्तमान: कांग्रेस शासनकाल में जिस जनभावना के साथ इस कॉलेज की नींव रखी गई थी, वर्तमान सरकार की उदासीनता उसे ध्वस्त कर रही है।
अंतिम विकल्प: जनांदोलन
विधायक तिवारी ने कड़े शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की मूकदर्शक वाली भूमिका अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी दल की नहीं, बल्कि पहाड़ की आम जनता के जीवन के अधिकार की है। यदि सरकार ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो जनहित में एक निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा।


