प्रकृति से स्वरोजगार: जौलकांडे बनेगा बर्ड वाचिंग का नया केंद्र

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प्रकृति से स्वरोजगार: जौलकांडे बनेगा बर्ड वाचिंग का नया केंद्र
प्रकृति से स्वरोजगार: जौलकांडे बनेगा बर्ड वाचिंग का नया केंद्र

युवाओं को मिला ‘एडवांस प्रशिक्षण’

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर जनपद बागेश्वर की समृद्ध प्राकृतिक संपदा और पक्षियों की अनूठी दुनिया अब स्थानीय युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया द्वार खोलने जा रही है। इसी विजन के साथ जौलकांडे गांव में दो दिवसीय ‘एडवांस बर्ड वाचिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का शानदार आगाज हुआ। इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र को वैश्विक इको-टूरिज्म के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना है।


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प्रमुख अंश: प्रशिक्षण और विजन

  • आर्थिक सशक्तिकरण: मुख्य विकास अधिकारी (CDO) आरसी तिवारी ने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि स्थानीय प्रतिभा को यदि सही मार्गदर्शन और तकनीकी कौशल मिले, तो वे अपनी प्राकृतिक विरासत को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि उत्तराखंड की जैव-विविधता अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखती है।
  • नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन: जिला पर्यटन विकास अधिकारी पीके गौतम ने विश्वास जताया कि जौलकांडे जल्द ही देश-दुनिया के बर्ड लवर्स के लिए एक प्रमुख पड़ाव बनेगा।
  • विशेषज्ञ मार्गदर्शन: प्रशिक्षण में विशेषज्ञों द्वारा पक्षियों की पहचान, उनके व्यवहार (Behavior), प्राकृतिक आवास और संरक्षण की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वरिष्ठ ट्रेनर राजेश भट्ट एवं प्रदेश के विख्यात बर्ड वाचर राजीव बिष्ट द्वारा दिया जा रहा है।

महत्व: “यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर गाइड और होमस्टे जैसी गतिविधियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगा।”

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