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बागेश्वर से बड़ी खबर: तीन साल से गोदामों में कैद शहीदों की यादें !

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तैयार हैं शिलापट, लेकिन नहीं मिली जगह

अमृत सरोवर योजना पर विभागीय लापरवाही उजागर



सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की स्मृति को सम्मान देने की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना जिले में फाइलों और गोदामों तक सिमटकर रह गई है। हालात यह हैं कि पिछले तीन वर्षों से शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर तैयार किए गए शिलापट धूल में दबे पड़े हैं, जबकि गांवों में उनके स्थापना कार्य की कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में केंद्र और राज्य सरकार की इस योजना की शुरुआत बड़े उद्देश्य के साथ हुई थी—ग्राम पंचायत स्तर पर स्मारक बनाकर बलिदानियों की याद को स्थायी रूप देना। लेकिन बागेश्वर जिले में यह पहल अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग ने पहले ही 150 से अधिक शिलापट तैयार करा लिए हैं। इसके बावजूद इन्हें ग्राम पंचायतों में स्थापित करने की प्रक्रिया अटकी हुई है। न तो स्मारक निर्माण पूरा हुआ और न ही इन शिलापटों को गांवों तक पहुंचाया जा सका। परिणामस्वरूप, ये स्मृति चिन्ह लंबे समय से गोदामों में उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं।

ग्रामीणों में नाराजगी, उठी सवालों की आवाज

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह योजना केवल कागजों में ही सिमटकर रह गई है। जिस उद्देश्य से इसे शुरू किया गया था—शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देना—वह विभागीय उदासीनता के कारण अधूरा रह गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्मारकों का निर्माण पूरा कर शिलापट स्थापित कराने की मांग की है।

31 मार्च की डेडलाइन, कार्रवाई की चेतावनी : मुख्य विकास अधिकारी आर.सी. तिवारी ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि 31 मार्च तक सभी शिलापट गांवों में स्थापित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय सीमा का पालन न होने पर संबंधित विभाग और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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