जागेश्वर धाम के कुबेर मंदिर में श्रीमद्भागवत
गौ संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का आह्वान
सीएनई रिपोर्टर, पनुवानौला: देवभूमि की पावन धरा जागेश्वर धाम स्थित कुबेर मंदिर में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा बह रही है। श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धालुओं का उत्साह अपने चरम पर रहा। आस्था के इस संगम में क्षेत्रीय जनता ने बड़ी संख्या में शिरकत कर कथा रसपान किया।
कथा व्यास पूरन पांडे ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए एक अत्यंत मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि “मनुष्य के भीतर वह सामर्थ्य छिपा है कि वह अपने आचरण और सत्कर्मों के बल पर सामान्य मानव से देवत्व की श्रेणी में पहुंच सकता है।” उन्होंने बताया कि सनातन धर्म के मूल तत्वों को जीवन में उतारना ही सच्ची मानवता है।
आंगन में फिर लौटे ‘गौ’ और ‘संस्कृति’
प्रवचन के दौरान कथा व्यास ने वर्तमान समय की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि:
- गौ संरक्षण: सनातन परंपरा में गौ माता का स्थान सर्वोपरि है। हमें गौ सेवा को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि पुनः अपने घर-आंगन से जोड़ना होगा।
- विरासत की सुरक्षा: गांवों की चौपालों से ही हमारी सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहती है। इसे बचाना समाज के हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है।
- नई पीढ़ी का निर्माण: बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा और सुविधाएं देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें संस्कारों और जीवन मूल्यों से जोड़ना अनिवार्य है ताकि वे एक मजबूत समाज की नींव रख सकें।
“देवभूमि की अनमोल परंपराएं हमारी पहचान हैं। हर सनातनी के मन में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव होना चाहिए।” — कथा व्यास पूरन पांडे
भक्तिमय रहा माहौल
श्रीमद्भागवत कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान विपीन गुप्ता, मोहन चंद्र भट्ट और नवीन चंद्र भट्ट ने व्यास पीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस धार्मिक अनुष्ठान में बाबा विश्वास गिरि महाराज और मंडलेश्वर बंशी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया।
कार्यक्रम में शुभम भट्ट, रेवाधर पांडे, कैलाश भट्ट, नीता पांडे, विमला भट्ट, बीना भट्ट, प्रकाश भट्ट, योगेश भट्ट, लक्ष्मी दत्त, जगन्नाथ भट्ट, जगदीश भट्ट, रूप सिंह सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु और मातृशक्ति मौजूद रही।


