👉 धरना-प्रदर्शन व नारेबाजी कर केंद्र सरकार के खिलाफ उगला गुस्सा
👉 मनरेगा को बचाने और पहले से अधिक सशक्त बनाने की पुरजोर मांग
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ के तहत कांग्रेसजनों ने आज जिले के विभिन्न ब्लाक मुख्यालयों पर हल्ला बोला। उन्होंने जगह-जगह धरना-प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ गुस्सा उगला और आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा को कमजोर करने पर तुली है। हर ब्लाक से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे गए, जिसमें मनरेगा को बचाते हुए उसे पहले से अधिक सशक्त बनाने की मांग उठाई गई है।

हवालबाग़ ब्लॉक मुख्यालय में आज कांग्रेस पार्टी ने एक दिनी धरना-प्रदर्शन किया। धरने के माध्यम से मनरेगा योजना को कमजोर करने, मजदूरों को समय पर रोजगार नहीं देने और लंबित मजदूरी भुगतान नहीं होने के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज किया। धरने को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने कहा कि मनरेगा देश की गरीब, ग्रामीण जनता की जीवनरेखा है, लेकिन भाजपा सरकार जानबूझकर बजट में कटौती व मजदूरी के भुगतान में देरी करते हुए योजना को समाप्त करने की साजिश रच रही है। इसका सीधा असर गरीब मजदूरों, महिलाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की कि सभी मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही लंबित मजदूरी का तत्काल भुगतान किया जाए और मजदूरी दर बढ़ाई जाए। उन्होंने मनरेगा को कमजोर करने वाली सभी नीतियों को वापस लेने की पुरजोर मांग उठाई। धरने के दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने मनरेगा के प्रति अपना रवैया नहीं बदला, तो कांग्रेस जनांदोलन को तेज करेगी।
इस धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज व ब्लॉक अध्य्क्ष हवालबाग़ प्रथम आनंद सिंह बिष्ट, हवालबाग द्वितीय शिवराज नयाल समेत जिला पंचायत सदस्य कुंदन राम, नारायण सिंह, रविंद्र मुस्यूनी, प्रेम सिंह, केशव पाण्डेय, देव सिंह भोजक, चन्दन भोज, किशन सिंह, इन्दर सिंह सोभन दत्त, आनंद सिंह बिष्ट, मोहन सिंह, गोपाल जोशी राजेंद्र सिंह सुरेश राम, सुंदर लाल, राजेंद्र नेगी आदि अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसके अलावा विकासखंड लमगड़ा में कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष मनोज रावत, धौलोदवी में ब्लाक अध्यक्ष महिपाल प्रसाद, भैसियाछाना में ब्लाक अध्यक्ष पूरन सुप्याल, ताकुला में ब्लाक अध्यक्ष राजू भट्ट के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन के कार्यक्रम हुए और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे गए।

