HomeUttarakhandAlmoraअल्मोड़ा: स्वास्थ्य सेवाओं को मुफ्त एवं सर्वसुलभ बनाने की पुरजोर वकालत

अल्मोड़ा: स्वास्थ्य सेवाओं को मुफ्त एवं सर्वसुलभ बनाने की पुरजोर वकालत

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👉 12वीं पुण्यतिथि पर राजकीय संग्रहालय की पूर्व प्रभारी स्व. मंजू तिवारी को श्रद्धांजलि दी

👉 ‘जन स्वास्थ्य पर जनसंवाद’ विषयक संगोष्ठी, मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नाखुशी

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: राजकीय संग्रहालय में पूर्व प्रभारी स्व. मंजू तिवारी की 12वीं पुण्यतिथि पर जन स्वास्थ्य संघर्ष मोर्चा अल्मोड़ा ने ‘जन स्वास्थ्य पर जनसंवाद’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की। जिसमें वक्ताओं ने स्वास्थ्य सेवाओं के मौजूदा हालातों पर चिंता जताई और जन स्वास्थ्य सेवाओं को पूर्णत: मुफ्त, सार्वजनिक व सर्वसुलभ करने पर की पुरजोर मांग उठाई।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पूर्णतः निशुल्क, गुणवत्तापूर्ण एवं सर्वसुलभ होनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते व्यवसायीकरण और व्यापारीकरण को जनविरोधी बताते हुए इसे अविलंब समाप्त करने की मांग उठाई। वक्ताओं ने स्व. मंजू तिवारी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि मंजू तिवारी की मृत्यु त्रुटिपूर्ण चिकित्सा उपचार से हुई, जो वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर कमजोर होती जा रही हैं, जिसके कारण राज्य के अनेक नागरिक बेहतर उपचार की तलाश में मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन करने को विवश हैं। आयुष्मान भारत योजना की आड़ में निजी चिकित्सालय रोगियों के आर्थिक शोषण कर रहे हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकारी क्षेत्र की समस्त स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए।

वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ उच्च शिक्षा भी आम जनता की पहुंच से निरंतर दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा को सरकारी क्षेत्र में नि:शुल्क किया जाना चाहिए तथा उत्तराखंड में कार्यरत चिकित्सकों के लिए एक निश्चित अवधि तक सरकारी सेवा अनिवार्य की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, चिकित्सकों द्वारा बाहर से दवाइयां लिखने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने और सरकारी अस्पतालों को निजीकरण से बचाए जाने की मांग की गई। यह चिंता व्यक्त की गई कि स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के कारण आज भी राज्य के अनेक ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसूता महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार रोगियों की समय पर उपचार न मिलने से असमय मृत्यु हो जाती है।

सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जन स्वास्थ्य संघर्ष मोर्चा समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर जन स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करने हेतु अपने संघर्ष को और अधिक व्यापक एवं सशक्त बनाएगा।कार्यक्रम का संचालन विनोद तिवारी ने किया। संगोष्ठी को वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह रावत, यूकेडी जिला अध्यक्ष दिनेश जोशी, आनंदी वर्मा, यूकेडी नेता शिवराज सिंह बनोला, विनय किरोला, भूपेंद्र बल्दिया, डॉ. रेनू, ममता, जगदीश चंद्र पांडे एवं गणेश चंद्र पांडे आदि वक्ताओं ने संबोधित किया। संगोष्ठी के संयोजक एवं उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में एड. जीवन चंद्र, मोहम्मद वसीम, शाकिब, पान सिंह, भावना पांडेय, आशा, धीरेंद्र मोहन पंत आदि ने प्रतिभाग किया।

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