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सावधान! आपके ही घर में आपको ‘कैदी’ बना सकते हैं ये डिजिटल ठग

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देहरादून के बुजुर्ग दंपति से ₹12.80 लाख की ठगी

CNE REPORTER, देहरादून: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई आपको आपके ही घर में 6 दिनों तक बंधक बना ले, और वह भी बिना सामने आए? देहरादून के सहस्त्रधारा रोड पर एक बुजुर्ग दंपति के साथ यही खौफनाक खेल खेला गया।

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साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मायाजाल बुनकर एक कंस्ट्रक्शन व्यवसायी और उनकी पत्नी को न केवल मानसिक प्रताड़ना दी, बल्कि उनकी जीवन भर की कमाई से 12 लाख 80 हजार रुपये भी साफ कर दिए।

एक ‘फेक कॉल’ और खौफ के 144 घंटे

घटना 7 दिसंबर को शुरू हुई। पंकज अग्रवाल (बदला हुआ नाम) के पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को ‘मुंबई क्राइम ब्रांच’ का अधिकारी बताया। ठगों ने उन्हें डराते हुए कहा:

  • “आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है।”
  • “आपका बैंक खाता जेट एयरवेज घोटाले से जुड़ा है।”
  • “2 करोड़ का अवैध लेनदेन हुआ है और आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी है।”

घर बना ‘डिजिटल जेल’

ठगों ने दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर लिया। उन्हें आदेश दिया गया कि वे 6 दिनों तक न तो फोन काटेंगे और न ही किसी रिश्तेदार या दोस्त से बात करेंगे। यहाँ तक कि पति-पत्नी आपस में बात करने से भी कतराने लगे। ठगों ने धमकी दी कि अगर किसी को बताया, तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी जेल भेज दिया जाएगा।

इसी मानसिक दबाव का फायदा उठाकर ठगों ने खातों की ‘जांच’ के नाम पर 12 लाख 80 हजार रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। हद तो तब हो गई जब ठगों ने निर्दयता दिखाते हुए कहा कि— “घर खर्च के लिए केवल 20 हजार रखो, बाकी सब ट्रांसफर करो।”

पुलिस की कार्रवाई

जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने 13 दिसंबर को हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की। रायपुर थाना प्रभारी गिरीश नेगी के अनुसार, साइबर थाने से जीरो एफआईआर मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ठगों की तलाश कर रही है।


जागरूक बनें: डिजिटल अरेस्ट से बचने के ‘गोल्डन रूल्स’

अगर आपके पास भी ऐसा कोई कॉल आता है, तो इन 4 बातों को गांठ बांध लें:

  1. कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट‘ जैसा कोई शब्द नहीं है: कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी (CBI, ED, Police) वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार नहीं करती और न ही घर में नजरबंद रखती है।
  2. पैसों की मांग मतलब ठगी: कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर खातों की जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती।
  3. डरे नहीं, फोन काटें: यदि कोई आपको डराता है, तो तुरंत फोन काट दें और अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर बात करें।
  4. गोपनीयता न बरतें: ठग आपको ‘सीक्रेट’ रखने को कहेंगे, लेकिन आप तुरंत अपने बच्चों या भरोसेमंद रिश्तेदारों को इसकी जानकारी दें।

याद रखें: आपकी जागरूकता ही इन साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा इलाज है। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत 1930 पर दें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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