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नेहरू युवा केंद्र की योजनाओं में ‘गंभीर अनियमितता’ का आरोप

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छात्र संघ अध्यक्ष लोकेश सुप्याल ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग

CNE REPORTER, अल्मोड़ा। उत्तराखंड में नेहरू युवा केंद्र (MY BHARAT) द्वारा संचालित युवा और खेल योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का सनसनीखेज आरोप लगा है। एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा के छात्र संघ अध्यक्ष लोकेश सुप्याल ने इन योजनाओं के तहत हो रही भर्तियों में गड़बड़ी और खेल बजट के दुरुपयोग का दावा करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जाँच की मांग की है। आरोप है कि केंद्र सरकार से खिलाड़ियों के लिए जारी करोड़ों रुपये का बजट जमीन पर नहीं पहुंच रहा है।

छात्र संघ अध्यक्ष लोकेश सुप्याल ने सीधे तौर पर इन केंद्रीय योजनाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से स्वयंसेवकों (Volunteer) की जो भर्तियाँ हाल ही में की गईं, वे बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन के, अत्यंत सीमित समय के लिए पोर्टल खोलकर गुपचुप तरीके से की गईं। इस प्रक्रिया ने चयन की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

सुप्याल का कहना है कि खेल विकास के लिए केंद्र सरकार करोड़ों रुपये का बजट जारी कर रही है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ जमीनी स्तर के खिलाड़ियों और ग्रामीण युवाओं तक नहीं पहुँच रहा है।

  • निम्न गुणवत्ता की खेल किट: गाँवों में वितरित की जा रही खेल सामग्री और किट की गुणवत्ता बेहद घटिया बताई जा रही है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग का संकेत मिलता है।
  • औपचारिकता बनकर रह गईं प्रतियोगिताएं: ब्लॉक और जिला स्तर पर आयोजित होने वाली खेल प्रतियोगिताएँ महज खानापूर्ति बनकर रह गई हैं, जो युवाओं को प्लेटफॉर्म देने के मुख्य उद्देश्य को विफल कर रहा है।

लोकेश सुप्याल ने अल्मोड़ा स्थित नेहरू युवा केंद्र/खेल विभाग के कार्यालय पर भी गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कार्यालय अक्सर बंद रहता है और अधिकारियों की नियमित उपस्थिति नहीं होती, जिससे युवाओं और आम जनता को आवश्यक जानकारी लेने या शिकायत दर्ज कराने में भारी परेशानी होती है।

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी धन के समुचित उपयोग और योजनाओं में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

इस संबंध में छात्र संघ अध्यक्ष ने पहले ही आरटीआई ऑनलाइन, जिलाधिकारी अल्मोड़ा को लिखित शिकायत और मुख्यमंत्री पोर्टल उत्तराखंड पर शिकायत दर्ज करा दी है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या एजेंसियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि आवंटित धन का उपयोग वास्तविक खिलाड़ियों के हित में हो सके।

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