HomeUttarakhandAlmoraAlmora News : बड़ा सवाल: व्यवस्थाएं नहीं, तो क्यों खोले अस्पताल?

Almora News : बड़ा सवाल: व्यवस्थाएं नहीं, तो क्यों खोले अस्पताल?

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अल्मोड़ा में स्वास्थ्य सेवाएँ चरमराई

बेस और महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड ठप, मरीज़ परेशान!

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। अल्मोड़ा जिला मुख्यालय की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बेस अस्पताल (मेडिकल कॉलेज) और महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड (USG) सेवाएं लगातार दूसरे दिन भी ठप रहने से दूर-दराज से आए मरीज़ों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों प्रमुख अस्पतालों में एक साथ रेडियोलॉजिस्ट (Ultrasound Specialist) की अनुपस्थिति के कारण, हर दिन लगभग 60 से अधिक मरीज़ों को बिना जांच कराए ही मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों के लिए विशेष रूप से कष्टकारी बन गई है।

संकट की जड़: दोनों अस्पतालों में विशेषज्ञ ग़ायब

अल्मोड़ा शहर के दो महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्रों, बेस अस्पताल और महिला अस्पताल में, एक-एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति है। हालांकि, बेस अस्पताल जो अब मेडिकल कॉलेज के अधीन है, वहाँ कार्यरत रेडियोलॉजिस्ट नौकरी छोड़कर चले गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, वहाँ की अल्ट्रासाउंड सेवाएँ पूरी तरह बाधित हो गई हैं।

दूसरी ओर, महिला अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट इन दिनों अवकाश पर चल रहे हैं। परिणामस्वरूप, दो मुख्य अस्पतालों में एक साथ जांच नहीं होने से मरीज़ों की परेशानियाँ कई गुना बढ़ गई हैं।

ज़िला अस्पताल पर बढ़ा भार, घंटों इंतज़ार

चूँकि बेस और महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा बंद है, इसलिए सभी मरीज़ अब एकमात्र विकल्प, ज़िला अस्पताल (डफरिन) की ओर रुख कर रहे हैं। इससे ज़िला अस्पताल में मरीज़ों का बोझ (लोड) अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। लिहाज़ा, बड़ी संख्या में मरीज़ों के पहुँचने से उन्हें अपनी जांच के लिए घंटों तक लंबी कतारों में इंतज़ार करना पड़ रहा है। विशेष रूप से, दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों से आए लोगों को लंबी यात्रा के बाद भी घंटों इंतज़ार करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से कष्ट झेलना पड़ रहा है।

निजी अस्पतालों की शरण में मजबूर मरीज़

सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न मिलने से कई ज़रूरतमंद मरीज़ों को मजबूरन निजी (प्राइवेट) अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। निश्चित रूप से, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ है, जो पहले से ही उपचार के खर्च से जूझ रहे हैं।

आधिकारिक पक्ष

इस संबंध में ज़िला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (पीएमएस) डॉ. एचएस गडकोटी ने आधिकारिक बयान दिया है। उन्होंने कहा:

“महिला अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट इन दिनों अवकाश पर हैं। इस कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। ज्यों ही रेडियोलॉजिस्ट वापस आएँगे, उसके तुरंत बाद अल्ट्रासाउंड सेवाएँ फिर से शुरू कर दी जाएँगी।”

अल्मोड़ा के स्वास्थ्य प्रशासन को इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान खोजना होगा, अन्यथा मरीज़ों की कठिनाइयाँ आने वाले दिनों में और भी बढ़ सकती हैं।


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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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