5000+ परिवारों का भविष्य दांव पर, प्रशासन मुस्तैद
हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर/78 एकड़ के आसपास बताई जाने वाली भूमि पर दशकों से चले आ रहे अतिक्रमण मामलों पर सुप्रीम कोर्ट 2 दिसंबर को निर्णायक सुनवाई/फैसला सुनाने की संभावना जताई जा रही है। इस संवेदनशील मामले में जिला प्रशासन, रेलवे और पुलिस ने पूरे इलाके को कड़ी सुरक्षा के घेरे में ले लिया है और व्यापक तैयारियाँ की गई हैं।
CNE REPORTER, हल्द्वानी : शहर से सटे बनभूलपुरा में रेलवे की 30 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में सुप्रीम कोर्ट कल, 2 दिसंबर को अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना सकता है।

यह न्यायिक निर्णय करीब 5,236 परिवारों के आवास और भविष्य पर सीधा असर डालेगा। फैसले के मद्देनजर, जिला एवं पुलिस प्रशासन ने किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता तैयारी कर ली है। पूरे बनभूलपुरा इलाके को संवेदनशील मानते हुए उसे पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
बनभूलपुरा : पहले क्या हुआ था !
हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से जुड़ी लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार, 2 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण फैसला आने की उम्मीद है। तो जानते हैं मामले की पृष्ठभूमि:

- इस मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में नैनीताल हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) से हुई थी।
- नैनीताल हाईकोर्ट ने 2023 में इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया था।
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद, स्थानीय लोगों के तीव्र विरोध और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई टल गई थी। तब से यह मामला देश की शीर्ष अदालत में विचाराधीन है।
- बनभूलपुरा क्षेत्र में लगभग 3,660 आवासीय इकाइयां हैं, जिनमें अनुमानित 5,236 परिवार निवास करते हैं, जो इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
प्रशासन की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था:
- फैसले से पूर्व, रेलवे अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से कई बैठकें की हैं और सुरक्षा रणनीति को अंतिम रूप दिया है।
- क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सशस्त्र पुलिस बल और पीएसी की टुकड़ियों को तैनात किया गया है।
- कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुफिया एजेंसियों को भी सक्रिय किया गया है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या शरारती तत्व की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
- पुलिस प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
- सुरक्षा बलों ने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी भ्रामक अफवाह पर ध्यान न देने की अपील करते हुए इलाके में फ्लैग मार्च किया है।
- प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे पूरी स्थिति पर गहरी नजर रखे हुए हैं और माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फरवरी 2024 की घटना का सबक:
- यह क्षेत्र पहले भी 8 फरवरी 2024 को हुई हिंसा का गवाह रहा है, जब नजूल भूमि पर बने एक अवैध मदरसे को ध्वस्त करने की कार्रवाई के दौरान बवाल हो गया था।
- उस दौरान, अराजकतत्वों ने बनभूलपुरा थाने को आग लगा दी थी और पुलिस कर्मियों तथा अधिकारियों पर पथराव किया था, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस हिंसक घटना के बाद प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा था।
- पिछली घटना के कड़वे अनुभवों को देखते हुए, प्रशासन इस बार अत्यधिक सतर्कता बरत रहा है ताकि शांतिपूर्ण ढंग से न्यायिक आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
बनभूलपुरा का मसला केवल जमीन-अतिक्रमण का मामला नहीं रह गया है — यह कानूनी, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े जटिल मुद्दों का संयोजन बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ न केवल दर्जनों हज़ार लोगों के घरों का भविष्य बल्कि इलाके की शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की संभावनाएँ भी प्रभावित होंगी। इसलिए अदालत के निर्देशों के साथ प्रशासन, नागरिक समाज और प्रभावित समुदायों के बीच संवाद व संवेदनशीलता सबसे जरूरी होगा।

