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बांग्लादेश तख्तापलट का एक साल : कितना हुआ बदलाव, अब क्या हैं हालात ?

59 हिंदुओं की हत्याएं, 33 रेप और सैकड़ों मंदिरों पर हमले

किसी भी जनपद में 50 प्रतिशत भी नहीं रहा हिंदू !

5 अगस्त 2024। यानी की वो तारीख जिसने बांग्लादेश का इतिहास बदल दिया। पिछले साल इसी दिन बांग्लादेश में लंबे आंदोलन, सैकड़ों हत्याओं के बाद शेख हसीना की सरकार पलट दी गई। जिसके बाद ऐस कट्टरवाद शुरू हुआ कि बांग्लादेश खुद अपना ही इतिहास भूल गया। बांग्लादेश की विदेश नीति ने लगभग यू टर्न लिया और जिस पाकिस्तान से बतौर स्वतंत्र देश के रूप में वजूद में आने के लिए बांग्लादेश ने लाखों कुर्बानियां दी, नए शासक मोहम्मद यूनुस उसी पाकिस्तान के साथ गलबहियां करने लगे।

शेख हसीना के शासनकाल में बांग्लादेश ने आर्थिक प्रगति और धर्मनिरपेक्षता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। आवामी लीग सरकार ने जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों पर कड़ा नियंत्रण रखा था। लेकिन शेख हसीना के पतन के साथ ही मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर लगा प्रतिबंध हटा लिया, जिससे कट्टरपंथी ताकतें और सशक्त हुई।

थमने का नाम नहीं ले रहे हिंदुओं पर अत्याचार

बांग्लादेश में पिछले साल हुए तख्तापलट के बाद से अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत चले जाने के बाद डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी नई अंतरिम सरकार से शांति की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पिछले एक साल में 59 हिंदुओं की हत्या, 33 महिलाओं से रेप और 192 मंदिरों पर हमलों की चौंकाने वाली घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे हिंदू समुदाय को खौफ में डाल दिया है।

बांग्लादेश हिंदू-बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 से जून 2025 तक अल्पसंख्यकों पर 2,442 सांप्रदायिक हमले दर्ज किए गए हैं। इन हमलों में न सिर्फ हत्याएं और रेप शामिल हैं, बल्कि जमीन हड़पने की 59 घटनाएं और 1,993 घरों व दफ्तरों पर हमले और लूटपाट भी हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 42 मामलों में लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर उनकी नौकरियां छीन ली गईं।

तख्तापलट के बाद शुरू हुई हिंसा की आग

पिछले साल अगस्त में जब शेख हसीना ने इस्तीफा दिया और देश छोड़ दिया, तो उसके बाद के शुरुआती 15 दिन हिंदुओं के लिए सबसे बुरे साबित हुए। कोटा सिस्टम के खिलाफ भड़के आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया और भीड़ ने अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के मुताबिक, सिर्फ 4 से 20 अगस्त, 2024 के बीच ही 2,010 हमले किए गए। इन शुरुआती 15 दिनों में 9 हिंदुओं की हत्या और 157 घरों व दुकानों में लूटपाट कर आग लगा दी गई।

बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद शुरू हुई हिंसा के दौरान कई जघन्य अपराध हुए। पत्रकार प्रदीप कुमार भौमिक और रिटायर्ड टीचर मृणाल कांति चटर्जी जैसे कई निर्दोष हिंदुओं को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। वहीं, पुलिस सब इंस्पेक्टर संतोष चौधरी की हत्या कर उनकी लाश को पेड़ से बांध दिया गया था। ये घटनाएं दिखाती हैं कि यह हिंसा कितनी क्रूर और सुनियोजित थी।

सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में अंतर

जहां एक ओर बांग्लादेश सरकार के मीडिया एडवाइजर शफीकुल आलम दावा करते हैं कि हसीना सरकार के मुकाबले हालात बेहतर हैं और सरकार शांति बहाली में लगी है, वहीं दूसरी ओर ढाका के वकील गोविंद चंद्र प्रामाणिक का कहना है कि सरकार और उसकी नीतियों में हिंदू कहीं नहीं हैं। उनका कहना है कि सलाहकार परिषद और सुधार समितियों में एक भी हिंदू सदस्य नहीं है।

बांग्लादेश, तख्तापलट का एक साल : 59 हिंदुओं की हत्याएं, 33 रेप और सैकड़ों मंदिरों पर हमले
बांग्लादेश, तख्तापलट का एक साल : 59 हिंदुओं की हत्याएं, 33 रेप और सैकड़ों मंदिरों पर हमले

एकतरफा कार्रवाई में हिंदुओं को जेल, कोई वकील केस लड़ने को तैयार नहीं

पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद भी कम है। चटगांव के रहने वाले जगन्नाथ दास झरना बताते हैं कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए 19 हिंदू लोगों को जेल भेज दिया और उन्हें मुकदमा लड़ने के लिए कोई वकील नहीं मिल रहा। यह दिखाता है कि प्रशासन भी अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदनशील नहीं है।

हालांकि, खबरें आईं कि भीड़ ने हिंदुओं को बेरहमी से मारा। हमने कुछ पीड़ित परिवारों से बात की, तो ये कहानियां फिर सामने आ गईं।

कुछ प्रमुख हत्याएं :

  1. प्रदीप कुमार भौमिक
    मर्डर: 4 अगस्त, 2024
    सिराजगंज जिले के रायगंज में रहने वाले प्रदीप कुमार भौमिक जर्नलिस्ट थे। 4 अगस्त की दोपहर प्रदर्शनकारियों ने सिराजगंज के रायगंज प्रेस क्लब को घेर लिया। उन्होंने प्रदीप कुमार भौमिक को पकड़ लिया और पीट-पीटकर मार डाला।
  2. रिपन शील
    मर्डर: 4 अगस्त 2024
    रिपन शील हबीबगंज के रहने वाले थे। उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप एक मुस्लिम युवक पर लगा था।
  3. मृणाल कांति चटर्जी
    मर्डर: 5 अगस्त 2024
    65 साल के रिटायर्ड टीचर मृणाल कांति चटर्जी बागेरहाट जिले के छोटापाइकपारा के रहने वाले थे। तख्तापलट वाले दिन भीड़ उनके घर में घुस गई। उन्हें बुरी तरह पीटा। मृणाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनकी पत्नी और बेटी जख्मी हो गईं।

मृणाल की पत्नी शेफाली बताती हैं, ‘भीड़ ने मेरे पति को मार डाला। पूरे घर में तोड़फोड़ की और सब लूट ले गए। हमारे पास कुछ भी नहीं बचा।’

  1. हराधन रॉय
    मर्डर: 5 अगस्त 2024
    रंगपुर के रहने वाले हराधन रॉय नगर निगम के पार्षद थे। 4 अगस्त को दोपहर एक बजे भीड़ ने हराधन रॉय और उनके भतीजे की हत्या कर दी। हराधन शेख हसीना की पार्टी से जुड़े थे ।
  2. अजीत सरकार
    मर्डर: 5 अगस्त 2024
    दोमकोना गांव के रहने वाले अजीत सरकार का मर्डर तख्तापलट वाले दिन ही किया गया।
  3. संतोष चौधरी
    मर्डर: 5 अगस्त 2024
    संतोष चौधरी भी हबीबगंज के रहने वाले थे। वे बानियाचोंग पुलिस थाने में सब इंस्पेक्टर थे। तख्तापलट वाले दिन ड्यूटी पर थे। तभी भीड़ ने पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। फिर उनकी डेडबॉडी पेड़ से बांध दी।
  4. स्वपन बिस्वास
    मर्डर: 8 अगस्त 2024
    खुलना जिले के रहने वाले स्वपन भी भीड़ का शिकार हुए थे। 8 अगस्त की रात वे बाजार गए थे। रात करीब 10 बजे भीड़ ने उन्हें घेर लिया। सिर पर हथौड़ा मारकर उनकी जान ले ली। स्वपन की डेडबॉडी जहां मिली, वहीं पास में हथौड़ा भी पड़ा था।
  5. टिंकू रंजन दास
    मर्डर: 11 अगस्त, 2024
    ढाका से 16 किमी दूर नारायणगंज जिले के रहने वाले टिंकू रंजन कपड़ा कारोबारी थे। दोपहर 12 बजे भीड़ ने घर के पास ही उन्हें घेर लिया। पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। तब बांग्लादेश में तख्तापलट को सिर्फ एक हफ्ते हुआ था।
  6. सुशांत सरकार
    मर्डर: 18 अगस्त 2024
    30 साल के सुशांत ब्राह्मणबारिया जिले के नसीराबाद गांव में रहते थे। परिवार के मुताबिक, गांव का ही आशिक नाम का लड़का सुशांत को बुलाने आया था। वे उसे जानते थे, इसलिए साथ चले गए। अगले दिन सुबह गांव के पास मेघना नदी के किनारे सुशांत की डेडबॉडी मिली। सुशांत की हत्या की गई, तब उनका बच्चा सिर्फ दो हफ्ते का था।

मो. यूनुस वायदे पूरे करने में फेल साबित

बताना चाहेंगे कि तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला और व्यवस्था बहाल करने, सुधारों के बाद नए चुनाव कराने का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है। देश में राजनीतिक अस्थिरता का दौर अब भी जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की अगुवाई वाली विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने दिसंबर या फरवरी में चुनाव की मांग की है, जबकि यूनुस सरकार अप्रैल में चुनाव की बात कह रही है। पूर्व में प्रतिबंधित इस्लामी दलों को यूनुस सरकार के तहत उभरने का अवसर मिला है। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र नेताओं ने एक नया राजनीतिक दल बना लिया है, जो संविधान में व्यापक बदलाव की मांग कर रहा

वहीं, हसीना की अनुपस्थिति में उन पर मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मुकदमा चल रहा है। वह इस समय भारत में निर्वासन में हैं। अलबत्ता हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध है और पिछले एक साल में हिरासत में उसके 24 से अधिक समर्थकों की मौत हो चुकी है।

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Deepak Manral
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DEEPAK MANRAL E-Mail : [email protected] >> Successful experience of journalism in the field of Daily Hindi News papers & Magazines. (Amar Ujala, Uttaranchal Deep, Pradhan Times Daily, Katyuri Mansarovar, Dharmyudh etc.) >> Career Objective : To broaden my vision by continuous learning & taking up challenging assignments. >> Summary : A total experience of nearly 6 years in the field of desk top publication, Edition & News Reporting Major part had been working with “Amar Ujala” as a News Reporter and later Bureo Chief Bageswar. I have been exposed to both criminal & political Reporting. >> Work Experience : Organization : Ms Amar Ujala publication ltd. Worked as a News Reporter with this reputed Hindi Newspaper wherein exposed to both criminal & Political reporting while being attached to their various offices at Haldwani, Almora, Ranikhet & Bageshwar Duration : 6 Years (Jan 2001 to May 2006) Organization : M/s Katyuri Prakashan (A family owned publication house taking out Quarterly magazines namely ‘Katyuri Mansarovar’ & ‘Dharmyudh’. >> Key Performance Areas Editing of the articles being received from various sources. Handling all related correspondences. Freelance writing in various News Papers : 3 Years (2009 to 2011) Ms Uttaranchal Deep Hindi Daily >> Duration : 7 Years (2012 to 2018) >> Key performance Areas Covered criminal reporting while based at Haldwani. Covered political reporting while based at Almora Office. Was responsible for mainly editing job while based at Ranikhet & Subsequently at Bagheswar office. >> Academic Qualification : M.A. (Hindi) from Kumaun University in 1999. 6 Monts computer Course from JCTI, New Delhi. B.A. From Delhi University in 1996 12th from CBSE, Delhi in 1993 >> Technical Expertise : Proficiency in DTP. Proficient in Page Maker & Coral Draw. Good Knowledge of English & Hindi typesetting. Hardcore Knowledge of composing & editing. >> Personal Profile : Date of Birth : 13th Nov, 1974 Father’s Name : Late Mr. Balwant Manral >> Communication Address : Manral Sadan, Narsing Bari, Almora (Uttarakhand) 263601
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