Trump Tariff Impact: आज भारतीय शेयर बाजार के लिए एक चुनौतीपूर्ण दिन था, जिसकी मुख्य वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ओर से दिए गए टैरिफ (आयात शुल्क) संबंधी बयान रहे। ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने की संभावनाओं और उनके संरक्षणवादी (protectionist) नीतियों के चलते बाजार में भारी अनिश्चितता देखने को मिली। दिन भर के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी उतार-चढ़ाव रहा और अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।
सेंसेक्स और निफ्टी की चाल
आज के दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स ने दिन की शुरुआत में बड़ी गिरावट के बाद खुद को संभाला, लेकिन आखिर में लगभग 296 अंक की गिरावट के साथ 81,185.58 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी लगभग 86 अंक गिरकर 24,768.35 के स्तर पर बंद हुआ।
सेक्टरों का हाल : बाजार में आज ज्यादातर सेक्टरों में गिरावट देखी गई।
निफ्टी ऑटो में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
बैंकिंग, मेटल, फार्मा और रियलिटी इंडेक्स भी घाटे में रहे।
कुछ शेयरों में तेजी रही, जिनमें हिंदुस्तान यूनिलीवर और ITC जैसे नाम शामिल हैं।
बाजार में दिनभर का हाल: निवेशकों में घबराहट
बताना चाहेंगे कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। आज सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट साफ नजर आई। ट्रंप की टैरिफ नीतियों के डर से बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती घंटों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। निवेशकों को डर था कि अगर ट्रंप सत्ता में आते हैं, तो वे भारत से आने वाले सामानों पर भारी शुल्क लगा सकते हैं, जिसका सीधा असर भारतीय कंपनियों के निर्यात और मुनाफे पर पड़ेगा।
हालांकि, दिन के मध्य में कुछ खरीदारी भी देखने को मिली, जिससे बाजार में थोड़ी रिकवरी हुई। लेकिन, यह सुधार टिक नहीं पाया और कारोबार के अंत में बाजार फिर से नीचे चला गया।
किन सेक्टरों पर पड़ी सबसे ज्यादा मार?
ट्रंप की टैरिफ की घोषणा का सबसे ज्यादा असर उन भारतीय सेक्टरों पर पड़ने की आशंका है, जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में निर्यात करते हैं। आज के कारोबार में भी यही देखने को मिला।
ऑटो सेक्टर: निफ्टी ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। भारत अमेरिका को ऑटो कंपोनेंट्स (Automobile Components) का एक बड़ा निर्यातक है, इसलिए निवेशकों को इस सेक्टर में बड़ी चुनौतियों का डर सता रहा है।
आईटी और फार्मा: आईटी और फार्मा कंपनियां भी अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर हैं। इन दोनों सेक्टर्स में भी बिकवाली का दबाव देखा गया।
मेटल: अमेरिकी टैरिफ का मेटल सेक्टर पर भी बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि यह भी निर्यात आधारित सेक्टर है।
बैंकिंग और रियल्टी: इन दोनों सेक्टर्स में भी गिरावट देखने को मिली, जो बाजार की समग्र नकारात्मक भावना को दर्शाती है।
आगे की राह क्या?
भारतीय शेयर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका में होने वाले चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में यह अनिश्चितता बनी रह सकती है। ट्रंप की नीतियां विश्व व्यापार के लिए एक बड़ा खतरा मानी जा रही हैं, जिसका असर सिर्फ भारत पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सावधानी बरतें और उन कंपनियों पर नजर रखें जिनका व्यापार घरेलू बाजार पर ज्यादा निर्भर है। निर्यात आधारित कंपनियों में निवेश करने से पहले जोखिम का अच्छी तरह से मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण होगा। बाजार की आगे की दिशा अमेरिका के चुनाव परिणामों पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
भारतीय शेयर बाजार में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्लान से खलबली

