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व्यापारी को रिकवरी ऐजेंट कर रहे थे परेशान, परिवार सहित दे दी जान

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घर का नजारा देख पुलिस के भी उड़े होश

बिटिया ने स्कूल जाने के लिए प्रेस करके टांगी थी स्कूल ड्रेस

सीएनई रिपोर्टर। बड़े—बुजुर्गों ने कहा है कि जितनी चादर हो उतने ही पांव पसारने चाहिए। आय के साधन सीमित होने पर खर्च अधिक और बार—बार कर्जा लेना इंसान को मुश्किल में डाल देता है। दरअसल, लाखों रुपये के कर्ज से परेशान व रिकवरी ऐजेंटों के व्यवहार से व्यथित होकर चौक अशरफाबाद निवासी कपड़ा व्यवसायी शोभित रस्तोगी (48 साल) ने अपनी पत्नी व बेटी के साथ जहर खा जीवन लीला समाप्त कर ली। एक घर से सुबह के समय जब माता—पिता और बेटी के शव एक साथ निकले तो हर किसी की आंखें नम थीं। किसी को कुछ समझ नहीं ​आ रहा था कि आखिर इतने मिलनसार व अच्छे स्वभाव के इस परिवार ने ऐसा कदम क्यों उठा लिया।

लखनऊ के कारोबारी शोभित रस्तोगी (48), उनकी पत्नी शुचिता (45) और बेटी ख्याति (16) ने सोमवार तड़के जहर खा लिया था, जिसके बाद तीनों की ही मौत हो गई थी। पुलिस को जांच में शोभित की पत्नी की ओर से लिखा सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने चौंकाने वाली बातें लिखी हैं।

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उसने सुसाइड नोट में लिखा- ”मम्मी के पास काफी प्रॉपर्टी है। उनसे कई बार लखनऊ में साथ में शिफ्ट होने के लिए कहा। लेकिन दीदी के कहने पर मम्मी नहीं आई। मम्मी का व्यवहार अब अच्छा नहीं है। दीदी ने मम्मी को रुपए भी देने से मना कर दिया। दीदी मम्मी को लखनऊ नहीं आने देती हैं। शुचिता ने अपने भाई की नेपाल में हत्या का भी जिक्र किया है। शुचिता ने अपने जीजा विवेक को लेकर कई सवाल खड़े किए। उसने आगे लिखा- बहुत बैंक लोन हो गया। कोई मदद नहीं करता है। सब लोग स्वार्थी हैं।”

शनिवार से ही बंद कर दी थी दुकान

जांच—पड़ताल में पता चला है कि शोभित ने सोमवार सुबह पत्नी और बेटी के साथ जहर खाकर सुसाइड कर लिया था। कपड़ा व्यापारी शोभित रस्तोगी दो दिन से सुसाइड करने का प्लान कर रहे थे। जिसका प्रमाण यह है कि शनिवार को शोभित शाम 4 बजे ही दुकान बंद करके घर आ गए थे। अगले दिन अपने भाई शेखर को घर की चाबी देकर कहा कि ससुराल जा रहा हूं। इसके बाद सोमवार सुबह तीनों के शव मिले थे।

फैशन पॅाइंट नाम से थी कपड़े की दुकान

शोभित रस्तोगी की राजाजीपुरम में जुगल फैशन पॉइंट के नाम से कपड़े की दुकान है। उनके बगल के दुकानदार अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार को शाम 4 बजे शोभित अपनी दुकान बंद करके जाने लगा। दुकान पर आकर बताया कि बारिश का मौसम आ रहा है। घर पर कुछ काम करवाना है, उसको करवाने के लिए जा रहा हूं। बातचीत से तो ऐसा नहीं लग रहा था कि कुछ परेशान है। उसके ऊपर कितना कर्ज है, इसकी भी जानकारी नहीं दी। घटना की जानकारी अन्य दुकानदारों से हुई। शोभित काफी मिलनसार व्यक्ति थे।

ख्याति ने मरने से पहले किया था फोन

कारोबारी की बेटी ख्याति ने हालत बिगड़ने पर अपनी बड़ी मां तृप्ति को कॉल करके बताया कि मम्मी-पापा की तबीयत ठीक नहीं है, आप लोग जल्दी से आ जाइए। घर पहुंचने पर अंदर से लॉक लगा था। दूसरी चाबी मंगाकर कमरा खोला गया तो अंदर तीनों बेसुध हालत में पड़े थे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों को ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।

कोल्डड्रिंक में मिलाकर खाई थी सल्फास

घटनास्थल से पुलिस को सल्फॉस की तीन पुड़िया और एक टैबलेट मिली है। बताया जा रहा है कि परिवार ने पूरी तीन पुड़िया सल्फास कोल्डड्रिंक में मिलाकर पी ली थीं। मौके से दो कोल्डड्रिंक की बोतल भी मिली हैं।

स्कूल जाने के लिए बिटिया ने की थी ड्रेस प्रेस

शोभित की बेटी ख्याति लखनऊ पब्लिक स्कूल राजाजीपुरम में 11वीं में पढ़ रही थी। वह 22 जून से स्कूल जा रही थी। सोमवार को स्कूल जाने के लिए एक दिन पहले उसने ड्रेस प्रेस करके रख लिए थे। वहीं, पास में किताबें भी रखी थीं। अचानक से क्या कुछ हुआ, इसकी जानकारी परिवार को भी नहीं है।

शोभित पर था 50 लाख का लोन

पुलिस के अनुसार शोभित के ऊपर 45 से 50 लाख का लोन था। जिसकी एक-दो किस्त बाउंस होने की वजह से शोभित परेशान हो गए थे। रिकवरी एजेंट भी फोन पर और घर आकर वसूली का दबाव बनाने लगे थे। इस वजह से कई दिनों से उलझन चल रही थी, लेकिन किसी को कुछ बता नहीं पा रहे थे। पिछले दो दिन तक उन्होंने आत्महत्या करने की प्लानिंग की। इसके बाद सोमवार को परिवार के साथ सुसाइड कर लिया।

फिर पहुंचे रिकवरी एजेंट, आत्महत्या का पता चलते खिसक लिए

स्थानीय लोगों ने बताया कि रिकवरी एजेंट अक्सर घर पर पहुंचते थे। शोभित से अभद्रता करते थे, पड़ोसियों के मुताबिक शोभित और उनके परिजनों की आत्महत्या के बाद भी रिकवरी एजेंट घर पहुंचे थे। पुलिस व अन्य लोगों को देख कर चुपचाप वापस चले गए थे।

जानिए, रिकवरी एजेंट के काम और आपके अधिकार

रिकवरी एजेंट (Recovery Agent) एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसे बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा ऋण वसूली के लिए नियुक्त किया जाता है। यह व्यक्ति, बैंक का कर्मचारी न होते हुए भी, बकाया ऋणों की वसूली के लिए ग्राहकों से संपर्क करता है।

एजेंट का काम:

बकाया ऋणों की वसूली के लिए ग्राहकों से संपर्क करना
ग्राहकों को भुगतान के लिए प्रेरित करना
ऋण वसूली के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान करना
बैंक और ग्राहकों के बीच मध्यस्थता करना

वसूली एजेंट के अधिकार:
ग्राहकों से सम्मानजनक तरीके से बात करना
सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही ग्राहकों से संपर्क करना
अपनी पहचान और प्राधिकरण पत्र दिखाना
वसूली प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट जानकारी देना

ग्राहकों के अधिकार:
सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार का अधिकार
निजता का अधिकार (Loan details सार्वजनिक नहीं की जा सकती)
स्पष्ट सूचना का अधिकार (वसूली कार्रवाई से पहले नोटिस)
शिकायत दर्ज करने का अधिकार (अगर दुर्व्यवहार होता है)

अगर रिकवरी एजेंट दुर्व्यवहार करता है:
आप पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं
आप बैंक में शिकायत दर्ज करा सकते हैं
आप बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं
आप सिविल कोर्ट में भी जा सकते हैं

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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