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गरुड़: लिपि एवं सुलेख कला के इतिहास से रुबरु हुए बच्चों में जागी नई सोच

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✍️ देवनागरी व रोमन लिपि के सुलेख पर घांघली में दो दिनी कार्यशाला आयोजित
✍️ ‘आंखरांकन’ की ओर से बच्चों में रचनात्मक जागृति लाने की पहल

सीएनई रिपोर्टर, गरूड़: बागेश्वर जनपद के गरुड़ ब्लाक अंतर्गत स्थित सनराइज पब्लिक स्कूल घांघली में दो दिवसीय कैलीग्राफी (सुलेख) कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला देवनागरी और रोमन लिपि के सुलेख पर आधारित थी। इस मौके पर मानव सभ्यताओं में लिपि और सुलेख कला का इतिहास समझाया गया। वहीं ‘आंखरांकन’ की ओर से ‘कुमाऊंनी कैलिग्राफी प्रदर्शनी’ भी लगी। कार्यशाला से बच्चों में नई रचनात्मक जागृति व उत्सुकता जागी।

स्कूल प्रबंधक गोपाल सिंह किरमोलिया के संयोजकत्व में यह दो दिनी सुलेख कार्यशाला ‘आंखरांकन’ के तत्वावधान में आयोजित हुई। जिसका लक्ष्य बच्चों व शिक्षकों को लिपि एवं कैलीग्राफी के इतिहास से रुबरु कराना था। इसका संचालन लाहुरघाटी स्थित सलखन्यारी गांव के निवासी सुलेखक (कैलीग्राफर) ललित तुलेरा ने किया। ‘आंखरांकन’ की ओर से ‘कुमाऊंनी कैलीग्राफी प्रदर्शनी’ भी लगाई गई। प्रदर्शनी में कुमाऊंनी साहित्य के तीन दर्जन से अधिक रचनाकारों की रचनाओं पर आधारित कैलीग्राफी की प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी का छात्र—छात्राओं ने बड़ी जिज्ञासा से अवलोकन किया और इससे प्रभावित बच्चों में सुलेख कला के प्रति रूचि जागृत हुई।

कार्यशाला के अंतर्गत कैलीग्राफर ललित तुलेरा ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को मानव सभ्यताओं में लिपि और कैलीग्राफी कला के इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोसापोटामिया सभ्यता में प्राचीन लिपियों के साक्ष्य पाए जाते हैं और इसी तरह विश्व की प्राचीन सभ्यताओं ने भी लिपि कला के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक, बौद्धिक विरासत को संजोया। भारत के इतिहास में लिपि का प्रमुख स्थान रहा है। विद्यालय की प्रधानाचार्य हेमलता आर्या ने बताया कि सुलेख पर कार्यशाला की बहुत जरूरत बनी हुई है। सुलेख कला कक्षा में विद्यार्थियों के बीच रचनात्मकता का माहौल पैदा करता है। इस मौके पर शिक्षक हिमांशु आर्या, आनंद भंडारी, दीपिका शर्मा, ललिता जोशी, चांदनी भंडारी, चांदनी जोशी, शोभा सिंह, अंजली, मीना तिवारी, भगवती मेहरा, प्रेमा किरमोलिया आदि उपस्थित रहे।

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