HomeUttarakhandAlmoraसूरत—ए—हाल: शर्तों पर मानदेय की नौकरी, उसमें भी कई झंझटें

सूरत—ए—हाल: शर्तों पर मानदेय की नौकरी, उसमें भी कई झंझटें

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✍️ एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के कैंपसों में तैनात अतिथि शिक्षकों में नाखुशी
✍️ आरोप निराधार हैं, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी: कुलपति

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के अधीन कैंपसों में गत जुलाई माह में तैनात अतिथि व्याख्याताओं में से कई नाखुश हैं। कुछ मानदेय नहीं मिल पाने, तो कुछ सख्त नियमों के साथ शपथपत्र भरवाने व असुविधा से खफा हैं। उनकी दबी जुबान से यह आरोप प्रकाश में आ रहे हैं कि रसूखदारों या अपने चहेतों को मुंह मांगे कैंपस में तैनाती दी गई और अन्य को दूर नियुक्त कर दिया। बताया जा रहा है कि ऐसी ​ही परिस्थितियों में कुछ अतिथि व्याख्याताओं ने ज्वाइन ही नहीं किया, हालांकि विश्वविद्यालय के कुलपति इन आरोपों को सिरे से नकार रहे हैं।

यहां उल्लेखनीय है कि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के अधीन अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ व बागेश्वर कैंपसों में पठन—पाठन को सुचारु करने के उद्देश्य से अतिथि शिक्षकों की तैनाती की गई। भले ही बेरोजगारी का दंश झेल रहे उच्च शिक्षित युवाओं ने 25 से 35 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर अतिथि व्याख्याता के रुप में कैंपसों में ज्वाइनिंग दी है, मगर इनमें से कई अतिथि व्याख्याता असंतुष्ट हैं और नाखुशी से उनमें आक्रोश के स्वर फूटने लगे हैं। स्थिति ये है कि पहले बागेश्वर, तो अब चंपावत कैंपस के अतिथि व्याख्याताओं को मानदेय के लाले पड़े हैं। वे मानदेय का इंतजार करते रह गए हैं। घर से दूर ज्वाइनिंग देकर बिना मानदेय वह आर्थिक कष्ट उठा रहे हैं। बकायदा इन कैंपसों के अतिथि शिक्षकों ने ज्ञापन भेजकर कुलपति से मानदेय का भुगतान करने की गुहार लगाई। अभी चंपावत कैंपस के अतिथि व्याख्याताओं को यह भुगतान नहीं हो पाया है।

सिर्फ मानदेय का ही मसला नहीं है, कई अतिथि व्याख्याता दबी जुबान से तैनाती में भेदभाव बरते जाने का आरोप भी लगाते हैं। आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह तो जांच का विषय है, किंतु उनका यह आरोप प्रकाश में आ रहा है कि रसूखदारों व अपने करीबियों को मनचाहे कैंपस में तैनाती दी गई और कुछ मामलों में नियमों को भी ताक में रखा गया। उनका कहना है कि इच्छा के विरुद्ध बेरोजगारी के दबाव के कारण उन्होंने तैनाती स्वीकारी। कई अतिथि व्याख्याता मानदेय पर दूर तैनाती से खफा हैं। कुछ अतिथि शिक्षकों को इस बात की टीस है कि मानदेय की नौकरी में उनसे सख्त नियमों के साथ शपथपत्र भरवाया गया। बताया जा रहा है कि इसी वजह से चयन के बावजूद कई युवाओं ने ज्वाइन ही नहीं किया। कुछ अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे कैंपसों में नये हैं। इसके बावजूद ज्वाइन करते ही उनके मत्थे अनुशासन, सांस्कृतिक, हाॅस्टल व खेल आदि समितियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी थोप दी। यह भी नाराजगी की एक वजह है। उनका कहना है कि अल्प मानदेय पर घरों से दूर तैनाती देकर मानदेय के लिए गुहार लगानी पड़ रही है और नई तैनाती होने के बावजूद अतिरिक्त जिम्मेदारियां थोप दी गई हैं। अनेक महिला शिक्षिकाओं ने मैचुवल स्थानांतरण की गुहार लगाई, किंतु अनसुनी हुई। कई शिक्षकों को कैंपसों में प्रिंटर, कंप्यूटर, सुलभ शौचालय, जैसी असुविधाएं झेलनी पड़ रही हैं।
आरोप निराधार, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी: कुलपति
अल्मोड़ा: अतिथि शिक्षकों की तरफ से लगाए जा रहे आरोपों के बाबत जब सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि सिर्फ चंपावत कैंपस को छोड़कर बांकी सभी जगह अतिथि व्याख्याताओं को मानदेय का भुगतान कर दिया गया है और एक—दो दिन में ही चंपावत में भी भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब मानदेय 35 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। कुलपति ने रसूखदारों व करीबियों को मनचाहे कैंपस में नियुक्ति देने के आरोप को पूरी तरह निराधार बताया। अतिरिक्त कार्य सौंपे जाने संबंधी शिकायत पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की नियमावली में स्पष्ट है कि अतिथि शिक्षकों या अन्य शिक्षकों से विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव, अनुशासन, प्रवेश आदि के कार्य ले सकता है। कुलपति ने कहा कि यदि किसी अतिथि शिक्षक को कोई परेशानी हो, तो वह सीधे उनसे मुलाकात कर अपनी समस्या बता सकता है। उन्होंने हिदायत भी दी कि विश्वविद्यालय में अनुशासनहीनता किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अनुशासनहीनता बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

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