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उपलब्धि : बेहतर सोच से जीआईसी अल्मोड़ा में अस्तित्व में आया विवेकानंद अध्ययन एवं शोध केंद्र

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अल्मोड़ा : यहां राजकीय इंटर कालेज अल्मोड़ा में स्थित स्वामी विवेकानंद अध्ययन एवं शोध केंद्र को एक साल पूरा होने पर स्थापना दिवस मनाया गया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह कार्यक्रम अत्यं​त सूक्ष्म रखा गया। इस मौके पर केंद्र के माध्यम से छ़ात्रों का नैतिक व चारित्रिक विकास करने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर केंद्र के प्रभारी डा. ललित जलाल ने केंद्र की स्थापना पर विस्तार से प्रकाश डाला।
केंद्र के प्रभारी डा. ललित जलाल ने कहा कि वर्ष 1889 में स्थापित राजकीय इंटर कालेज अल्मोड़ा ( उत्तराखंड ) ऐतिहासिक विद्यालय है। जो इंडो यूरोपियन शैली में निर्मित है। इस विद्यालय में 27 जुलाई 1897 को विश्व दिव्य पुरूष स्वामी विवेकानंद का आगमन हुआ, जहां सिद्धांत एव व्यवहार में वेदोपदोश में उनका प्रथम हिन्दी भाषण हुआ था। विशेषकर उत्तराखड के किसी विद्यालय में स्वामी विवेकानंद का भाषण हुआ था। इसी चिंतन के बाद यह केंद्र राइंका अल्मोड़ा में अस्त्त्वि में आया है। उन्होंने कहा कि जीआईसी के प्रधानाचार्य ने केंद्र खोलने की अनुमति दी और रामकृष्ण कुटीर अल्मोड़ा के अध्यक्ष ध्रुवेशानंद ने स्वामी जी का साहित्य उपलब्ध कराने में खासा सहयोग दिया। वहीं अंग्रेजी अध्यापक रामचंद्र सिंह रौतेला ने इस कार्य में​ विशेष सहयोग प्रदान किया। उन्होंने पुस्तकें खरीदने के लिए भी आर्थिक मदद की।
डा. जलाल ने कहा कि इस केंद्र में स्वामी विवेकानंद संबंधी साहित्य पर्याप्त रूप मौजूद है। जिनमें उनकी जीवनी, संस्मरण, नैतिक व शैक्षिक विचार, प्रेरक प्रसंग, शिकागो यात्रा का भाषण आदि से संबंधित साहित्य है। उन्होंने कहा कि छात्रों को स्वामी जी के जीवन दर्शन, आचार्य विनोवा भावे, अरविंदो व अन्य विशिष्ट व्यक्तियों के कार्यों से अवगत कराया जा रहा है। केंद्र के माध्यम से छात्रों में नैतिक शिक्षा, चारित्रिक विकास व आध्यात्मिक मूल्यों का संचार कराया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में यह केंद्र मील का पत्थर साबित होगा। वर्तमान में ज्ञानार्जन के लिए केंद्र में 800 पुस्तकें उपलब्ध हैं। इस मौके पर केंद्र के सह प्रभारी एवं अंग्रेजी अध्यापक राम चंद्र सिंह रौतेला व छात्र प्रभारी जे.बिष्ट भी उपस्थित थे।
डा. जलाल के अथक प्रयास से बना केंद्र :
दरअसल, राजकीय इंटर कालेज अल्मोड़ा में विद्यालय के ही विज्ञान​ शिक्षक डा. ललित जलाल की बेहतर सोच व चिंतन से स्वामी विवेकानंद अध्ययन एवं शोध केंद्र बन सका है। इसके लिए उन्होंने अथक प्रयास किए हैं। इस विद्यालय में स्वामी विवेकानंद के आगमन की बात से उनके मन में विचार आया कि छ़ात्र—युवाओं में वर्तमान में अनेकानेक नकारात्मक प्रवृत्तियां बढ़ते जा रही हैं। जिसमें नशे की प्रवृत्ति, हिंसक घटनाएं, चोरी की प्रवृत्ति, विद्यालय में गैरहाजिर रहना, विद्यालय से भागने की प्रवृत्ति, मौन प्रवृत्ति, आज्ञाकारिता का अभाव, मातृ—पितृ भक्ति का ह्रास आदि प्रवृत्तियां शामिल हैं। उनकी चिंता थी कि छात्रों का नैतिक, सामाजिक व चारित्रिक विकास करके नकारात्मक प्रवृत्तियों को कैसे रोका जाएं। तभी विद्यालय में स्वामी विवेकानंद अध्ययन एवं शोध केंद्र की स्थापना का विचार आया। इसके लिए विद्यालय के प्रधानाचार्य से लिखित अनुमति लेकर रामकृष्ण कुटीर अल्मोड़ा के अध्यक्ष ध्रुवेशानंद से वार्ता की और केंद्र की स्थापना के लिए अ​थक प्रयास किए। तब गत वर्ष यह केंद्र अस्तित्व में आ सका।

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