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वैज्ञानिक चर्चा: हिमालयी राज्यों की आत्मनिर्भरता के लिए डेटाबैंक का सुदृढ़ होना जरूरी, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन का 5वां शोधार्थी सम्मेलन

अल्मोड़ा। भारतीय हिमालयी राज्यों में शोध कर रहे शोधार्थियों द्वारा एकत्र आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन्हें और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत है। यह बात तमाम विषय विशेषज्ञों ने वीडियो कांफ्रेंिसंग के के जरिये शोधार्थियों के मूल्यांकन के दौरान कही। महत्वपूर्ण मंथन के साथ राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन का 5वां शोधार्थी सम्मेलन संपन्न हो गया है। जो यहां पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल में आयोजित हुआ।
दूसरे व अंतिम रोज विषय विशेषज्ञों ने कहा कि विभिन्न राज्यों में शोधार्थी जल संसाधनों, जैव विविधता और परम्परागत ज्ञान पर आॅकड़ों का संग्रहण कर रहे हैं, जो बेहद लाभदायक होंगे। वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार ललित कपूर और आईआईटी रूड़की के प्रो. एस.के. मिश्रा, कुमाऊ विश्वविद्यालय के प्रो. सीसी पंत तथा विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डा. जेसी भटट ने शोधार्थियों के प्रस्तुतीकरण का मूल्यांकन किया तथा आवश्यक सुझाव दिए। इस मौके पर शेर-ए-कश्मीर विवि के डा. इम्माद, ए. साह, आरएफआरआई के प्रदीपन राय, असम कृषि विवि के हेमंत पोखरियाल, अब्दुल मलिक, दीपांकर नाथ, आईसीएआर एनआरसीओ सिक्किम से डा. रामलाल, एनआईटी नागालैण्ड से माला पामई, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से डा. निदा रिजवी, निधि चिल्लर, अभिषेक चिल्लर आदि ने अपनी प्रस्तुतियां दी। शोधार्थियों द्वारा विभिन्न विषयों पर अपने शोधकार्यों को विषय विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया। इन शोध कार्यों की सराहना हुई और शोधार्थियों को कार्य की गुणवत्ता को बनाए रखने का सुझाव दिया।
सम्मेलन में मिशन के नोडल अधिकारी इंजीनियर किरीट कुमार ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण और जल संसाधन प्रबंधन पर विषय विशेषज्ञों की राय शोधार्थियों के लिए उपयोगी है और इससे शोध गुणवत्ता व कार्य में तेजी आएगी। इस मौके पर जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के निदेशक डा. आरएस रावल ने कहा कि शोधार्थियों का कार्य से हिमालयी राज्यों के बन रहे डेटाबेस और समृद्ध बनेगा। पंजाब केंद्रीय विवि के कुलपति प्रो. आरके कोहली, आईआईटी रूड़की के प्रो. एसके मिश्रा, कुमाऊं विवि के प्रो. सीसी पंत आदि शोधार्थियों का मूल्यांकन करेंगे। कार्यक्रम में संस्थान की ओर से वैज्ञानिक रंजन जोशी, संदीपन मुकर्जी, आशुतोष तिवारी, डा. ललित गिरी, तन्मय धर, जगदीश पाण्डे, अंकित धनै, योगेश परिहार, अरविंद टम्टा आदि ने सहयोग किया।

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