काले काले मेघा आए, उमड़ घुमड़ कर नभ में छाए गगन मंडल में दौड़ लगाए, जोर—जोर से शोर मचाए। ढलते रवि की रक्तिम आभा, अस्तांचल में रंग दिखाए पल में घटा घनघोर भयंकर, नभ में स्याह रंग भर जाए। नभ में लघु बूंदें जुड़ जुड़ कर, नाद अति गंभीर मचाए नभ से तुरत उतर उतर कर, तीव्र वेग से धरती को आए। नीरव गगन को उद्वेलित कर, गर्जन घोर चहुं ओर सुनाए संध्या काल दृश्य भयंकर, नभ से वारिद धरती को आए। धरा नभ हुए एक सम, शांत मेघ रौद्र रूप दिखाए चमक दमक दामिनी कड़कती, वारिद भैरव नाद सुनाए। अवसान हुआ पुनः दिवस का, रवि अस्तांचल उतर आए स्याह गगन मंडल में फिर, संध्या अद्भुत रूप दिखाए।
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।