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अल्मोड़ा : प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन पर तृतीय अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार शुरू

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✒️ राजकीय महाविद्यालय गुरुड़ाबांज में आयोजन

✒️ जानकारी, सुझाव एवं निदान के उपाय जरूरी

सीएनई रिपोर्टर, पनुवानौला/अल्मोड़ा

राजकीय महाविद्यालय गुरुड़ाबांज में प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन पर दो दिवसीय तृतीय अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार शुरू हो गया है। वेबीनार का बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी उत्तर प्रदेश भू-विज्ञान संस्थान करेलियन रिसर्च सेंटर पेट्रोजावोस्क रूस एवं राजकीय महाविद्यालय गुरुड़ाबाज अल्मोड़ा उत्तराखंड के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन किया जा रहा है।

दो दिवसीय वेबीनार का उद्घाटन करते हुए रूस के प्रो. सरजेई स्वेटोव ने कहा कि बेबीनार का शीर्षक आज के समय के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राकृतिक आपदाएं आए दिन कहीं न कहीं अक्सर आती रहती हैं। प्रो. सरजेई ने कहा कि इस प्रकार के वेबीनार नियमित रूप से होने चाहिए, जिससे आपदा के संबंध में प्रबंधन की जानकारी, सुझाव एवं निदान के उपाय खोजे जा सकें। भू-विज्ञान संस्थान करेलियन रिसर्च सेंटर पेट्रोजावोस्क रूस के निदेशक प्रो. सरगेई स्वेटोव एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान के प्रोफेसर वी.के. सिंह ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी एवं भूविज्ञान संस्थान पेट्रोजावोस्क (रूस) के बीच हुए शोध बिंदुओं को स्पष्ट किया।

लोगों ने कहा कि इससे आने वाले समय में आपदा प्रबंधन की योजना बनाने में अत्यंत सहायता मिलेगी। आई.आई.टी. पटना के निदेशक प्रो. टी.एन. सिंह ने हिमालयीय क्षेत्रों में शैल पिंडों के अस्थाईत्व के साथ उनके समुचित उपायों के बारे में जानकारी दी, जिससे इन्हें कम किया जा सके। के.आर. मंगलम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सी.एस. दुबे ने भूवर्तनिक आधार पर गढ़वाल हिमालय के प्राकृतिक आपदाओं पर विस्तृत जानकारी दी। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने जलवायु परिवर्तन का समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चर्चा की।

करेलियन रिसर्च सेंटर पेट्रोजावोस्क रूस के प्रोफेसर वी. शेकोव ने करेलिया में खनन और औद्योगिक विरासत के प्रक्रिया में मूल सुरक्षा के बारे में बताया तथा इसी संस्थान के प्रोफेसर ऐ.ऐ. लेवेदेव ने दक्षिण-पूर्वी फेनोस्कैंडिया में खदान विस्फोट को भूकंप का मुख्य कारण बताया। डी.आर.डी.ओ. दिल्ली के सेवानिवृत्त भूवैज्ञानिक एल.के. सिन्हा ने बर्फीले तूफानों एवं उनके नियंत्रण के बारे में चर्चा की। गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वाई.पी. सुंदरियाल उत्तराखंड हिमालय में जलवायु से उत्पन्न होने वाले आपदाओं के बारे में जानकारी दी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी की डॉ. आशा लता सिंह ने बैक्टीरिया, पर्यावरण और स्वास्थ्य आपदाओं के बारे में बताई।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रो. एस.सी. भट्ट ने जीआईएस और रसल विधि का प्रयोग करके बुंदेलखंड क्षेत्र में मृदा अपक्षय के बारे में चर्चा की। आई.आई.टी. रुड़की के डॉ. शारदा प्रसाद प्रधान ने उत्तराखंड हिमालय में भूस्खलन अनुसंधानो के बारे में जानकारी दी तथा पीयूष कुमार सिंह ने कुमायूं हिमालय के NH-09 के अनुदिश शैल स्थिरता में भौमिकीय संरचनाओं के प्रभावों की जानकारी दी। इस अवसर पर वेबीनार के संयोजक राजकीय महाविद्यालय गुरुड़ाबाज अल्मोड़ा के प्राचार्य प्रो. आर.ए. सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए वेबीनार की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा साथ ही पहाड़ों में रहने वाले लोगों को आपदा के पूर्व, आपदा के दौरान और बाद में आपदा से बचने के लिए विभिन्न सावधानियों की जानकारी दी। वेबीनार का संचालन संयोजक प्रो. वी.के. सिंह, समन्वयक अन्तरराष्ट्रीय छात्र प्रकोष्ठ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के द्वारा किया गया तथा साथ ही विभिन्न प्रकार के भूस्खलनों के बारे में भी जानकारी दी।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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