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अल्मोड़ा : यहां 56 बच्चों में मात्र 02 शिक्षक, उनमें से भी एक को अन्यत्र भेजा

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✒️ शिक्षिका जहां व्यवस्था में गई, वहां के आदर्श विद्यालय का भी हाल-बेहाल

✒️ क्या ऐसे सुधरेगी सरकारी शिक्षा ❗

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

🚨 अल्मोड़ा की नाक कट गई!
विदेशी पर्यटक ने दिखाई हकीकत
Almora News
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CNE - Creative News Express

प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के भले ही कितने दावे किये जा रहे हैं, लेकिन हकीकत आज भी इनसे बिल्कुल अलग है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था राम भरोसे ही चल रही है। इसकी एक मिसाल जनपद के राजकीय जूनियर हाईस्कूल कफलनी में देखी जा सकती है। जहां वर्तमान में अध्ययन 56 बच्चों पर मात्र दो ही शिक्षक हैं। उनमें से भी एक अध्यापिका को अन्यत्र व्यवस्था में भेज दिया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि पूर्व में डीएम व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन भेजने के बावजूद आज तक यहां की व्यवस्था सुधारने के लिए कुछ नहीं किया गया है।

उल्लेखनीय है कि जनपद अंतर्गत विकासखंड धौलादेवी के राजकीय जूनियर हाईस्कूल कफलनी में लंबे समय से प्रधानाध्यापक और भाषा के अध्यापक का पद रिक्त चल रहा है। इस विद्यालय में एक सहायक अध्यापक हैं। उनके पास प्रधानाध्यापक का भी चार्ज है। प्रधानाध्यापक का चार्ज होने से उनका अधिकांश समय विभागीय औपचारिकताओं को पूर्ण करने में लगा रहता है, जिससे वह शिक्षण कार्य करने में बहुत कम समय दे पाते हैं।

विद्यालय में एक सहायक अध्यापिका शिक्षण कार्य करने हेतु तैनात थी। उसी के सहारे अधिकतर तीन कक्षाओं का शिक्षण कोर्य संचालित हो रहा था। उसे भी वर्तमान में अग्रिम आदेशों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा दिये जाने के लिए खोले गये आदर्श विद्यालय राजकीय जूनियर हाईस्कूल मेलगांव में तैनात कर दिया गया है। यह आदर्श विद्यालय भी एक शिक्षिका के सहारे व्यवस्था पर चल रहा है।

इधर इस मामले में विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य व समाजिक कार्यकर्ता शिवदत्त पांडे ने बताया कि राजकीय जूनियर हाईस्कूल कफलनी की उक्त समस्या को मई 2022 में शिष्ट मंडल द्वारा जिलाधिकारी अल्मोड़ा को अवगत कराया गया था। इसके अलावा अगस्त 2022 को जिला शिक्षा धिकारी को भी एक ज्ञापन दिया गया था। इसके बावजूद सात माह का समय व्यतीत होने पर समस्या का समाधान किये जाने के बजाय विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका को व्यवस्था पर लगा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग को इस कुनीति का विद्यालय प्रबंधन समिति पुरजोर विरोध करती है। समिति की मांग है कि विभाग शीघ्र व्यवस्था में लगाई गई सहायक अध्यापिका को मूल विद्यालय में वापस लाये तथा प्रधानाध्यापक, भाषा के अध्यापक के रिक्त पद को भरे जाने की मांग करती हैं। ऐसा तत्काल भरा जाये। यदि ऐसा नहीं होता है तो विद्यालय प्रबंधन समिति आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

जब शिक्षक ही नहीं तो किस काम के कम्प्यूटर

समस्या यह है कि दन्या कस्बे से लगे इस विद्यालय में तीन कक्षाओं (06, 07 व 08) के लिये मात्र दो अध्यापक हैं। एक अध्यापिका है तथा पुरूष शिक्षक हैं। जिनके पास प्रधानाध्यापक का भी कार्यभार भी है। प्रधानाध्यापक का कार्यभार होने से समस्त विभागीय अन्य कार्य भी करने पडते हैं जिससे बच्चों के पठन पाठन के कार्य में व्यवधान हो रहा है। विद्यालय में स्मार्ट क्लास हेतु एल०सी०डी० एव कम्प्यूटर भी उपलब्ध हैं। अध्यापक कम होने से कम्प्यूटर शिक्षा का लाभ बच्चो को नहीं मिल पा रहा है। हालात यह है कि कंप्यूटर लंबे समय से नहीं चलने से खराब हो चुके हैं। विद्यालय में प्रधानाध्याक एवं सहायक अध्यापक (भाषा) का पद रिक्त चल रहा है। जिसे भरे जाने की प्रबंध समिति लंबे समय से मांग कर रही है, लेकन आज की तारीख तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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SOURCE: YOUTUBE SHORTS
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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