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ब्रेकिंग न्यूज : समय पर आशाओं का मानदेय न देने वाले सीएमओ से मांगें स्पष्टीकरण — सीएम

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नैनीताल। फ्रंट लाईन वर्कर्स आशाओं के मानदेय का भुगतान समय से करना सुनिश्चित करें, समय से भुगतान न करने वाले सीएमओ से तत्काल स्पष्टीकरण लिया जाये। यह निर्देश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम हेतु किये जा रहे कार्यों की वीसी के माध्यम से समीक्षा करते हुए चिकित्सा विभाग आला अधिकारियों को दिए। रावत ने जनपदों में कार्यरत आशा वर्करों की संख्या के सापेक्ष शतप्रतिशत भुगतान न करने वाले सीएमओं का तत्काल स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कोविड-19 में लगे फ्रण्ट लाईन वर्करों विशेषकर आशाओं को शतप्रतिशत प्रोटेक्शन किट उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि फ्रन्ट लाइन वर्करों को प्रोटेक्शन किट उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने आशा वर्करों के लिए स्मार्ट फोन की उपलब्धता शीघ्रता से सुनिश्चित कराने तथा स्मार्ट फोन के लिए स्वास्थ्य विभाग के आवश्यक साॅफ्टवेयर समय से तैयार करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए। रावत ने कहा कि बीएसएनएल के नेटवर्क प्रणाली के अपग्रेडेशन के लिए भारत सरकार में भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में दूर संचार सुविधाओं को और अधिक सुगम बनाया जा सके।

रावत ने कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम हेतु मास्क पहनने तथा सामाजिक दूरी के नियमों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों व पुलिस विभाग के अधिकारियों को दिए। उन्होंने मास्क न पहनने वालों, सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन न करने वालों के साथ ही होम क्वारंटीन नियमों का अनुपालन न करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कोविड-19 संक्रमित व्यक्तियों को समय से हायर सेंटर रेफर करने, रेस्पोन्स टाइम कम करने, कोन्टेक्ट ट्रेसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने, सर्विलांस कार्य को बहुत अधिक गहनता से करने के निर्देश भी सभी जिलाधिकारियों को दिए।

उन्होंने कोविड-19 संक्रमण के सीरियस केसो को सीएमओ द्वारा स्वयं देखने के साथ ही जिलाधिकारियों को ऐसें प्रकरणों की मोनीटरिंग और अधिक गहनता से करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य की मण्डियों विशेषकर हल्द्वानी, रामनगर, हरिद्वार, कोटद्वार, पोड़ी की मण्डियों में सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का शतप्रतिशत अनुपालन कराने के निर्देश भी जिलाधिकारियों को दिए। रावत ने निर्देशित करते हुए कहा कि कोविड-19 संक्रमण से बचाव के साथ ही विशेष सावधानियों एवं डाॅक्टरों की देख-रेख में इस संक्रमण का ईलाज भी संभव हैं, इस प्रकार के जन-जागरूकता लाने वाले सकारात्मक वीडियो एवं आॅडियो क्लिप बनाकर वायरल करते हुए जनता को जागरूक किया जाए और कोरोना संक्रमण पर विजय पा चुके व्यक्तियों के अनुभवों को भी साझा किया जाए।

रावत ने कहा कि पिछले लगभग 4 माह में कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए काफी काम किया गया है। इसी का परिणाम है कि वर्तमान में प्रदेश में कोरोना का रिकवरी रेट 81 प्रतिशत से अधिक है और यह निरंतर बढ़ रहा है। हमारे यहां एक्टीव मामलों की संख्या 500 से भी कम हो गई है। परंतु अभी आराम का समय नहीं है। सतत सतर्कता बनाए रखनी है। कान्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारेंटाईन सेंटरों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। डेथ आॅडिट रिपोर्ट में कोरोना संक्रमित की मृत्यु के कारणों का विश्लेषण कर देखा जाए कि कहां-कहां सुधार किए जाने की जरूरत है। क्लिनिकल मैनेजमेंट में गम्भीरतम मामलों पर उच्च स्तर से माॅनिटरिंग की जाए।

रावत ने सोशल मीडिया पर झूठी एवं फैक खबरे प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्यवाही करने के निर्देश भी सभी जिलों के डीएम को दिए। उन्होंने राज्य में साइबर क्राइम रोकने के लिए साइबर मोनीटरिंग कार्य को और अधिक गहनता से करने के निर्देश पुलिस विभाग के अधिकारियों को दिए।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि कोविड-19 को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय बहुत सोच समझकर लिया जाता है। प्रदेश में स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। अन्य बहुत से प्रदेशों से हमारी स्थिति बेहतर है। परंतु अभी भी हमारे प्रयासों में किसी प्रकार की ढ़िलाई नहीं आनी चाहिए।

कान्टेक्ट ट्रेसिंग में कमी न रहे। कोविड-19 के प्रति संवेदनशील बुजुर्गो, छोटे बच्चों और बीमार व्यक्तियों को टार्गेट करते हुए उनके हेल्थ स्टेटस को लगातार माॅनिटर किया जाए। जो भी डाटा प्राप्त होता है, जिलाधिकारी भी उसका विश्लेषण कर देखें कि उनके जिले में कहां कमियां रही हैं। उनमें सुधार किया जाए। कोविड-19 के साथ ही डेंगू पर भी ध्यान देना है। बरसात के सीजन को देखते हुए भी सभी तैयारियां कर ली जाएं।

सचिव अमित नेगी ने बताया कि राज्य में कोविड-19 के कुल एक्टीव केस 500 से भी कम रह गए हैं। पिछले सात दिन में कोरोना की वृद्धि दर 0.56 प्रतिशत है जबकि भारत में यह 1.28 प्रतिशत है। उत्तराखण्ड में पाॅजिटीविटी रेट 4.68 प्रतिशत है और देश में औसत पाॅजिटीविटी रेट 6.73 प्रतिशत है। राज्य में कुल पाॅजिटिव मामलों में से 89 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में और 11 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में पाए गए हैं। सेम्पलिंग में भी पहले की तुलना में लगातार बढ़ोतरी हुई है। राज्य की डबलिंग रेट 57.39 दिन है जबकि देश की डबलिंग रेट 23.52 दिन है।

उन्होंने बताया कि कोविड केयर सेंटरों में वर्तमान में 22601 रिक्त बेड उपलब्ध हैं। कोविड फेसिलिटी में 1126 आक्सीजन सपोर्ट बेड, 247 आईसीयू बेड और 159 वेंटीलेटर उपलब्ध हैं। जिलों को सेम्पलिंग के लिए 16 ट्रू-नेट मशीन उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। जिलों की आवश्यकता के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। वीसी में मण्डलायुक्त अरविन्द सिंह ह्यांकी ने फ्रंट लाइन वर्करों को प्रोटेक्शन किट प्राथमिकता से उपलब्ध कराने, आशा वर्करों के मानदेय का भुगतान प्राथमिकता से कराने, आशा वर्करों के साथ और अधिक बेहतर कम्यूनिकेशन के लिए उन्हें स्मार्ट मोबाईल फोन सुविधा उपलब्ध कराने, संस्कृति तथा सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग में पंजीकृत कलाकारों का भुगतान कराने, कोविड-19 की संक्रमण की जाॅच हेतु दो काट्र्रेज वाली ट्रू-नेट मशीन के स्थान पर चार काट्र्रेज वाली ट्रू-नेट मशीनें लगवाने, विभिन्न शहरी निकाय कार्मिकों के वैतन, बीएसएनएल के अपग्रेडेशन सिस्टम आदि के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

वीसी में जिलाधिकारी सविन बंसल ने जनपद में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के साथ ही विभिन्न जनपदों से आने वाले सैम्पलों की जाॅच आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वीसी में अपर आयुक्त संजय कुमार खेतवाल, संयुक्त निदेशक एटीआई नवनीत पाण्डे आदि उपस्थित थे।

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