HomeUttarakhandAlmoraकविता — वह सुबह जरूर आएगी

कविता — वह सुबह जरूर आएगी

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मई दिवस/अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर कवि एडवोकेट कवीन्द्र पन्त, अल्मोड़ा की कविता —

आज नहीं तो कल वह सुबह जरूर आएगी
जब धूप तेरे हिस्से की तेरे आंगन पर मुस्कुराएगी
मुसकुराती आंखों में चमक तेरे हौसलों की नजर आएगी
और उम्मीद जहां भर की खिलते होठों पर मुस्कुराएगी।

65 साल के मैराथन मैन महिपाल सिंह
65 की उम्र में शुगर को दी मात!
देखें 'फिट दादाजी' की पूरी कहानी (आवाज़ के साथ)

तेरी उम्मीद, तेरी मेहनत एक दिन रंग जरूर लाएगी
इन मेहनतकश हाथों की चुभन बेकार नहीं जाएगी
लकीरें हाथों में बनीं अनगिन कहानी खुद तेरी बताएगी
और ये लाली हाथों की तेरी भविष्य तेरा बनाएगी।

होगा सूरज वही पर एक दिन सुबह नई आएगी
जब उस सुनने वाले तक तेरी भी आवाज पहुंच जाएगी
मेहनत तेरी तब तेरे भी काम आएगी
और अट्टालिका ऊंची खुद तेरे मेहनत का गीत सुनाएगी।

घोर झंझावातों में हिम्मत तेरी तुझे नया रास्ता दिखाएगी
मंजिल तेरी तेरे चेहरे पे खुशी बन झलक आएगी
सांझ अंधेरी बीतेगी एक किरण सुबह सुनहरी आएगी
और मेहनत तेरी तरक्की का एक नया गीत गुनगुनाएगी।

एक दिन दुनिया में वह बदलाव की घड़ी आएगी
जब बात बड़े ध्यान से मेहनतकश की सुनी जाएगी
महत्ता तब श्रम की दुनिया को समझ में आएगी
और ज़िंदगी श्रमिक की एक आयाम नया बनाएगी।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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